मोहनलालगंज। लखनऊ, मोहनलालगंज कस्बे में सड़क की पटरियों पर अतिक्रमण हटाने को लेकर पूर्व में प्रशासन द्वारा चलाया गया संयुक्त अभियान एक बार फिर चर्चा में है। पूर्व एसीपी, इंस्पेक्टर एवं नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से गोसाईगंज मोड़ स्थित पुलिस चौकी से लेकर तहसीलदार आवास मोड़ तक सड़क के दोनों ओर लगे फल विक्रेताओं के ठेलों को हटवाया गया था। उस दौरान हिंदू-मुस्लिम सभी ठेला विक्रेताओं पर समान रूप से कार्रवाई कर अभियान को सफल बताया गया था।
हालांकि, अधिकारियों के स्थानांतरण के बाद स्थिति एक बार फिर बदलती नजर आ रही है। स्थानीय हिंदू समुदाय के फल विक्रेताओं का आरोप है कि उन्होंने प्रशासनिक निर्देशों का पालन करते हुए दोबारा ठेले नहीं लगाए, लेकिन एक विशेष समुदाय का फल विक्रेता अपने पुत्र के साथ काले वीर मंदिर गेट से लेकर तहसीलदार आवास तक लगातार ठेला लगाकर फल बेच रहा है। इसे लेकर अन्य फल विक्रेताओं में असंतोष और आक्रोश व्याप्त है।पीड़ित फल विक्रेताओं का कहना है कि ठेला न लगा पाने के कारण उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है और परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है।
उनका आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई समान नहीं है, जिससे असमानता की भावना पैदा हो रही है।इस संबंध में जब कस्बे में तैनात पुलिस कर्मियों से बात की गई तो पुलिस का कहना है कि संबंधित फल विक्रेता का ठेला कई बार हटवाया जा चुका है, लेकिन वह बार-बार पुलिस की बात न मानते हुए दोबारा ठेला लगा लेता है। पुलिस का यह भी कहना है कि उनके पास अन्य जिम्मेदारियां भी होती हैं, केवल एक ही स्थान पर पूरे समय निगरानी संभव नहीं है।
स्थानीय लोगों और फल विक्रेताओं का मानना है कि पुलिस के इस बयान से यह सवाल खड़ा होता है कि क्या संबंधित दबंग फल विक्रेता को कहीं न कहीं से संरक्षण मिल रहा है, जिसके चलते वह प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी कर रहा है। मामले ने अब सामाजिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है।अब देखना यह है कि प्रशासन ऐसे लोगों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई करता है, जो बार-बार नियमों की अवहेलना कर रहे हैं, और क्या सभी ठेला विक्रेताओं के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाएगा या नहीं। कस्बावासियों की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई