बसखारी की ग्राम सभाओं में कागजी ट्रेडर्स का बोलबाला, विकास कार्यों में बड़े फर्जीवाड़े की आशंका

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अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकर नगर।
जनपद के विकासखंड बसखारी की ग्राम सभाओं में हो रहे विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां पंचायतों को निर्माण व अन्य कार्यों के लिए जिन ट्रेडर्स के माध्यम से सामग्री आपूर्ति दिखाई जा रही है, उनमें से अधिकांश ट्रेडर्स जमीनी हकीकत में कहीं अस्तित्व में ही नहीं मिल रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार कागजों में ऐसे-ऐसे बड़े ट्रेडर्स दर्ज हैं, जो एक ही दुकान से सरिया, सीमेंट, गिट्टी, मोरंग, नट-बोल्ट, इलेक्ट्रॉनिक सामान से लेकर टेंट हाउस तक का पूरा सामान ग्राम सभाओं में सप्लाई कर रहे हैं। जब इन दुकानों को खोजने की कोशिश की गई तो कई ट्रेडर्स की दुकानें मौके पर मिली ही नहीं, जबकि कुछ जगह नाम मात्र की दुकान पाई गई, जहां इतना भारी-भरकम स्टॉक रखना लगभग असंभव प्रतीत होता है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्राम सभाओं को सामग्री सप्लाई के बदले दिए गए अधिकांश बिल बिना तारीख के हैं। नियमों के अनुसार बिना तारीख के बिल न केवल संदेहास्पद हैं, बल्कि जीएसटी और कर संबंधी नियमों के उल्लंघन की भी आशंका पैदा करते हैं। जानकारों का कहना है कि बिना तारीख के बिलों के जरिए भुगतान की तारीखों में हेराफेरी कर सरकारी धन के दुरुपयोग का रास्ता खुल जाता है।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कुछ ट्रेडर्स केवल कागजों में ही मौजूद हैं और इन्हीं के नाम पर पंचायतों से भुगतान निकाल लिया जाता है। वहीं जिन ट्रेडर्स की दुकानें वास्तव में मौजूद हैं, उनके यहां उपलब्ध जगह और स्टॉक को देखकर यह सवाल उठता है कि क्या वे वाकई उतनी मात्रा में सामग्री सप्लाई करने की क्षमता रखते भी हैं या नहीं।

बताया जा रहा है कि जिन ट्रेडर्स के नाम ग्राम सभाओं के अभिलेखों में सामने आ रहे हैं, उनमें प्रमुख रूप से एके ट्रेडर्स टांडा रोड बसखारी, कृष्णा एंटरप्राइजेज टांडा रोड बसखारी, जेपी ब्रिक फील्ड अजमेरी बादशाहपुर, वैष्णवी कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर, अशरफपुर किछौछा, अमन ब्रिक फील्ड, मेढी सलेमपुर, आजाद ब्रिक फील्ड, अन्यया ट्रेडर्स, सोनगांव अकबरपुर जैसे नाम शामिल हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय लोगों ने शासन प्रशासन से मांग की है कि सभी संबंधित ट्रेडर्स की भौतिक जांच कराई जाए। यह भी देखा जाए कि संबंधित दुकानों का वास्तविक अस्तित्व क्या है, उनके पास कितना स्टॉक रहता है, दुकान का आकार क्या है और क्या वह दर्शाई गई आपूर्ति के अनुरूप है या नहीं। साथ ही बिना तारीख के बिल काटने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और जीएसटी से जुड़े संभावित खेल की भी गहन जांच कराई जाए।

अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस कथित फर्जीवाड़े पर कब तक संज्ञान लेता है, या फिर विकास कार्यों की आड़ में कागजी ट्रेडर्स यूं ही सरकारी धन की बंदरबांट करते रहेंगे।


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