अम्बेडकरनगर में भारत मुक्ति मोर्चा का ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन
अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। संविधान और लोकतंत्र पर हो रहे हमलों के विरोध में भारत मुक्ति मोर्चा एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के संयुक्त आह्वान पर जनपद अम्बेडकर नगर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा के समक्ष विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रव्यापी आंदोलन के दूसरे चरण के अंतर्गत देश के 31 राज्यों के 725 जिला मुख्यालयों पर एक साथ संपन्न हुआ, जिससे आंदोलन की व्यापकता और जनसमर्थन स्पष्ट रूप से देखने को मिला।

धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी विकास पटेल ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश के तहत आरएसएस और भाजपा द्वारा बामसेफ, राष्ट्रीय मूल निवासी संघ एवं भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अधिवेशन को रोका गया, जो सीधे तौर पर संवैधानिक अधिकारों पर हमला है।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि देश के संविधानवादी, लोकतंत्र समर्थक और शोषित-वंचित समाज की है।
उन्होंने ओबीसी समाज के मुद्दों पर जोर देते हुए कहा कि जाति आधारित जनगणना, जनसंख्या के अनुपात में भागीदारी और ईवीएम हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को दबाने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन अब पिछड़ा वर्ग, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समाज जागरूक हो चुका है और अपने संवैधानिक हक-अधिकार लेकर ही रहेगा।
चौधरी विकास पटेल ने आंदोलन के आगामी चरणों की घोषणा करते हुए बताया कि संविधान एवं लोकतंत्र की रक्षा के लिए 22 जनवरी को राष्ट्रव्यापी रैली एवं प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। वहीं आंदोलन के अंतिम और निर्णायक चौथे चरण में 22 फरवरी को आरएसएस मुख्यालय नागपुर पर विशाल महारैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देशभर से 10 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है।
धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर के विचारों को आत्मसात करने और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बीएमपी युवा प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र राजभर, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा छात्रा प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुपम रंजन, भारत मुक्ति मोर्चा के जिलाध्यक्ष आत्माराम यादव, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के कार्यकारी जिलाध्यक्ष मनीराम पटेल, बीएमपी जिलाध्यक्ष लालजी गौतम सहित सूर्यभान पटेल, प्रदीप वर्मा, अरुण वर्मा, सोनू कुमार, पंकज मौलिक, रामनाथ अंबेश, रमाशंकर, भीम देव, लालजी बौद्ध, ओपी रंजन समेत सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित रहे।
धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने आंदोलन को मजबूती प्रदान की।