अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकर नगर।
विकासखंड बसखारी की ग्राम सभा मेढ़ी सुलेमपुर में पंचायत निधि के उपयोग को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। पंचायती राज विभाग की आधिकारिक वेबसाइट ई-ग्राम स्वराज पर वर्तमान ग्राम पंचायत सचिव को छोड़कर पूर्व में कार्यरत लगभग सभी सचिवों द्वारा बिना तारीख के बिल अपलोड किए गए हैं। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर बिना तिथि के बिल अपलोड करने के पीछे क्या मंशा रही और इसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई।

मामला वित्तीय सत्र 2023- 24 से जुड़ा है। अभिलेखों के अनुसार बाउचर संख्या 5THSFC/2023-24/40 के तहत ग्राम सभा में नाली निर्माण कार्य दर्शाया गया है। कागजों में नाली निर्माण पर मोटी धनराशि खर्च दिखाई गई है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे मेल नहीं खाती।
नाली निर्माण पर खर्च बनाम हकीकत0रिकॉर्ड के मुताबिक नाली निर्माण में=ईंट की खरीद पर 3,915 रुपये,0मजदूरी के नाम पर लगभग 15,000 रुपये,
तथा कंस्ट्रक्शन मद में 60,297 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। लेकिन स्थलीय निरीक्षण में न तो नाली बहुत लंबी पाई गई और न ही निर्माण इतना मजबूत या भारी दिखा, जिससे इतनी बड़ी राशि खर्च होना तर्कसंगत प्रतीत हो। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि किसी भी फर्म या ठेकेदार का बिल ई-ग्राम स्वराज वेबसाइट पर अपलोड ही नहीं किया गया।
मिट्टी पटाई कार्य पर भी सवाल
ग्राम सभा सलेमपुर में आंगनबाड़ी भवन और प्राथमिक विद्यालय एक ही परिसर में स्थित हैं। अभिलेखों में यहां लगभग 1,60,000 रुपये की मिट्टी पटाई दर्शाई गई है। जबकि मौके पर देखा गया कि आंगनबाड़ी केंद्र की जमीन बहुत सीमित है और कथित मिट्टी पटाई का कार्य वास्तविकता में आधा-अधूरा ही नजर आता है।
अन्य कार्यों में भी गड़बड़ी की आशंका
इसी परिसर में0आंगनबाड़ी केंद्र व प्राथमिक विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष,रसोईघर निर्माण,
पंचायत भवन की मरम्मत,0तथा पंचायत भवन में इन्वर्टर-बैटरी की खरीद जैसे कार्यों पर भी खर्च दर्शाया गया है।
इन सभी कार्यों में खर्च की राशि और जमीनी स्थिति के बीच बड़ा अंतर होने से भ्रष्टाचार की बू साफ तौर पर महसूस की जा रही है।
बिना तारीख के बिल ई-ग्राम स्वराज पर कैसे अपलोड हुए?भुगतान से पहले बिल और कार्य की गुणवत्ता की जांच क्यों नहीं हुई? क्या इन कार्यों की कभी स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच कराई गई? ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई तो ऐसे मामलों से पंचायत व्यवस्था की साख पर गंभीर सवाल खड़े होंगे। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग इस पूरे मामले पर क्या कार्रवाई करता है।