अवधी खबर संवाददाता
अयोध्या।
महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट पर ज़मीन कब्जाने और अवैध गतिविधियों में संलिप्त होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय सिख परिषद के अध्यक्ष एवं तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने ट्रस्ट पर अयोध्या के लोगों को रामराज्य की स्थापना का सपना दिखाकर ज़मीन लेने और बाद में उन्हीं ज़मीनों पर अवैध प्लॉटिंग कराने का आरोप लगाया है।

परमहंस आचार्य का कहना है कि ट्रस्ट प्रभावशाली वीवीआईपी कार्यक्रमों के जरिए प्रशासनिक रौब दिखाकर आम लोगों की ज़मीनों पर कब्जा कर रहा है। उन्होंने बताया कि तपस्वी छावनी की लगभग छह बीघा भूमि का मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है, जो ठाकुर रामलला विराजमान के नाम दर्ज है। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि गाटा संख्या 691 की 10 बिस्वा ज़मीन, जो ठाकुर रामलला विराजमान के नाम दर्ज है, उस पर भी ट्रस्ट द्वारा विश्वविद्यालय के नाम पर कब्जा करने का प्रयास किया गया।
आरोप है कि महर्षि रामायण विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम की आड़ में रातों-रात उक्त भूमि पर बाउंड्री वॉल का निर्माण करा दिया गया। परमहंस आचार्य ने इसे संत समाज की भावनाओं और धार्मिक परंपराओं के साथ खिलवाड़ बताया।
उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग करते हुए जिला प्रशासन से कथित अवैध कब्जों को तत्काल हटवाने की अपील की है। परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया कि महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट अयोध्या में भूमाफिया की तरह कार्य कर रहा है, जिससे धार्मिक आस्था और सामाजिक विश्वास को गंभीर ठेस पहुंच रही है। फिलहाल मामले ने तूल पकड़ लिया है और संत समाज व स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।