अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर।कोतवाली अकबरपुर में महिला आरक्षी आकांक्षा द्विवेदी की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में सीजीएम न्यायालय द्वारा अभियुक्त धीरेंद्र वर्मा की पुलिस रिमांड खारिज किए जाने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। न्यायालय की सख्त टिप्पणी के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या मामले की विवेचना निष्पक्ष ढंग से की गई।महिला आरक्षी आकांक्षा द्विवेदी, पुत्री अवधेश द्विवेदी, निवासी सिंहपुर थाना विधुनू जनपद कानपुर नगर, वर्तमान में पुलिस लाइन अकबरपुर में तैनात हैं और रगड़गंज क्षेत्र में किराये के मकान में रहती हैं।
उन्होंने 6 फरवरी 2026 को दी गई तहरीर में आरोप लगाया कि धुलाई के दौरान धीरेंद्र वर्मा पुत्र मयाराम निवासी अमेदा थाना इब्राहिमपुर ने उनका वीडियो बनाया। विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज, कपड़े फाड़कर लज्जा भंग करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया।वहीं अभियुक्त पक्ष का कहना है कि दोनों एक ही मकान में ऊपर-नीचे रहते हैं और कूड़ा फेंकने को लेकर विवाद हुआ था। उनका आरोप है कि इसी विवाद के बाद 112 नंबर पर सूचना देकर पुलिस बुलाई गई। यह भी चर्चा है कि मौके पर हुई कथित मारपीट के कुछ पहलुओं को विवेचना में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने अभियुक्त को गिरफ्तार कर रिमांड की मांग की, लेकिन सीजीएम न्यायालय ने रिमांड प्रार्थना पत्र में तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किए जाने पर नाराजगी जताते हुए रिमांड खारिज कर दी। न्यायालय ने टिप्पणी की कि केवल आरोपों के आधार पर किसी की स्वतंत्रता सीमित नहीं की जा सकती और विवेचना निष्पक्ष होनी चाहिए।रिमांड खारिज होने के बाद अब पुलिस की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि मामले की विवेचना जारी है, लेकिन न्यायालय की टिप्पणी ने पुलिस की कार्रवाई पर प्रश्नचिह्न जरूर खड़ा कर दिया है।




