जिलाधिकारी के सख्ती के बावजूद मनरेगा पर सवाल! बैरीबुजुर्ग में 10 मास्टर रोल पर एक ही फोटो अपलोड, 99 मजदूर दिखे कार्यरत

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अमित मांँझी

अम्बेडकरनगर(अवधी खबर)। जनपद में मनरेगा कार्यों की पारदर्शिता पर एक बार फिर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। विकास खंड जहांगीरगंज की ग्राम सभा बैरिबुजुर्ग में मनरेगा पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों ने व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वेबसाइट के अनुसार यहां 10 अलग-अलग मास्टर रोल पर कुल 99 मजदूर कार्यरत दिखाए गए हैं, जबकि जांच में सामने आया है कि 9 मास्टर रोल पर एक ही व्यक्ति का फोटो अपलोड किया गया है।

मनरेगा के नियमों के अनुसार प्रत्येक मास्टर रोल में कार्यरत मजदूर का अलग-अलग फोटो अपलोड किया जाना अनिवार्य है, ताकि फर्जी हाजिरी और भुगतान पर रोक लगाई जा सके। लेकिन बैरीबुजुर्ग में एक ही फोटो को कई मास्टर रोल पर अपलोड किया जाना नियमों की खुली अनदेखी दर्शाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक ही व्यक्ति का फोटो अलग-अलग नामों के साथ कई मास्टर रोल पर लगाया गया है, तो यह न केवल तकनीकी लापरवाही है बल्कि संभावित वित्तीय अनियमितता का संकेत भी हो सकता है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब 99 मजदूर कार्यरत दिखाए जा रहे हैं, तो क्या धरातल पर वास्तव में उतने श्रमिक काम कर रहे हैं या केवल कागजी खानापूरी की गई है?

उल्लेखनीय है कि हाल ही में जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने जिले के दो गांवों में अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई की थी। इसके बावजूद जहांगीरगंज विकास खंड में इस तरह की शिकायत सामने आना प्रशासनिक निगरानी पर प्रश्न खड़ा करता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए तो ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान, एपीओ मनरेगा, विकास खंड अधिकारी और डीसी मनरेगा की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार मनरेगा पोर्टल पर फोटो अपलोड की व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। ऐसे में एक ही फोटो का कई मास्टर रोल में प्रयोग होना नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है।

अब निगाहें जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। यदि जांच ईमानदारी से हुई तो जिले में मनरेगा कार्यों की सच्चाई सामने आ सकती है और दोषियों पर कार्रवाई संभव है।

जनपद में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने यह संकेत दिया है कि कागजों पर विकास और जमीनी हकीकत के बीच अंतर की गहन जांच आवश्यक है। प्रशासनिक सख्ती ही मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना की विश्वसनीयता बचा सकती है।


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