12 से 15 हजार रुपए वेतन पाने वाले कर्मचारियों को जीवन चलाना हुआ मुश्किल ध्यान नहीं दे रहीसरकार
अवधी खबर संवाददाता
भीटी अम्बेडकर नगर। साहब,12 हजार रुपया महीने में परिवार चलाने वाले संविदा कर्मी को दो महीने से वेतन नहीं मिला। तीसरा महीना से ज्यादा हो गया। अब बच्चों के देखभाल व खर्च के लिए, मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जैसे की दूध, दवाइयां, स्कूल खर्च, और घर के लिए राशन कहा से लाएं, यह दर्द है। उन सैकड़ों एनएचएम संविदा कर्मचारियों का जो अम्बेडकर नगर में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं।
उ0 प्र0 राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ ने सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सरकार को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है। भूखे पेट कैसे करें मरीजों की सेवा। संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा0 आमिर अब्बास ने बताया कि अधिकतर संविदा कर्मचारी 12 हजार से 15 हजार रुपए के मानदेय पर काम कर रहे हैं। दो महीने से वेतन न मिलने के कारण अब उनके घरों में खाने, पीने का सामान जुटाना भी दूभर हो गया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है। पर बच्चों की फीस और किताबों के लिए पैसे नहीं हैं।
जब पेट खाली हो तो दूसरों की जान बचाने की हिम्मत कहाँ से आए, एक महिला कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया सिर्फ वेतन नहीं, सालभर का हिसाब बाकी। ज्ञापन में खुलासा किया गया है, कि समस्या सिर्फ दो महीने के वेतन की नहीं है। जनपद में 2025, 26 की वार्षिक वेतन वृद्धि आज तक नहीं दी गई। लॉयल्टी बोनस का भुगतान नहीं हुआ। जुलाई 2025 से ईपीएफ भी जमा नहीं किया जा रहा।
कई कर्मचारियों का तो 2025 में बिना किसी कारण कई, कई महीने का वेतन रोक लिया गया। बार-बार गुहार के बाद भी प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। जिला अध्यक्ष संघमित्रा बौद्ध ने कहा कि यदि 20 मई तक भुगतान नहीं हुआ तो 21 मई से टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, ओपीडी, एनसीडी स्क्रीनिंग समेत ग्रामीण स्तर की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था ठप कर दिया गया है इससे जनता को होने वाली परेशानी की सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन, प्रशासन की होगी, ज्ञापन में स्पष्ट लिखा है।
ज्ञापन की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, श्रमिक संगठनों और प्रांतीय नेतृत्व को भी भेजी गई है। अब देखना है, कि 12हजार रुपए में घर चलाने वाले इन कर्मचारियों की आवाज सरकार के कानों तक कब पहुंचती है। 12 हजार रुपए मानदेय पाने वाले NHM संविदा कर्मचारी मार्च-अप्रैल 2026 का वेतन नहीं मिला, तीसरा महीना शुरू। वेतन वृद्धि, बोनस, ईपीएफ भी बकाया है। आखिर सरकार इनकी कब सुनेगी और फिर सरकार को यह सब दिखाई क्यों नहीं देता है।




