अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। जिले के गो-आश्रय स्थलों में पशु आहार की आपूर्ति को लेकर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आदेश के बाद नई चर्चा शुरू हो गई है। विभागीय पत्र के अनुसार अब जिले की सभी गौशालाओं एवं गो-आश्रय स्थलों के लिए पशु आहार की खरीद हरियाणा के अंबाला स्थित एक निर्धारित फर्म से की जाएगी। इसके साथ ही स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि संबंधित फर्म के अतिरिक्त किसी अन्य फर्म से पशु आहार की खरीद नहीं की जाएगी।
इस निर्णय के बाद जिले के व्यापारिक एवं सामाजिक हलकों में कई सवाल उठने लगे हैं। अब तक जनपद की विभिन्न गौशालाओं में पशु आहार की आपूर्ति स्थानीय एवं क्षेत्रीय स्तर की कई छोटी-बड़ी फर्मों द्वारा की जाती रही है। इन फर्मों से जुड़े लोगों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से उनके रोजगार और कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
स्थानीय व्यापारियों का तर्क है कि यदि जिले अथवा प्रदेश के भीतर ही गुणवत्तापूर्ण पशु आहार उपलब्ध था, तो फिर प्रदेश से बाहर की फर्म को प्राथमिकता देने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उनका कहना है कि इससे न केवल स्थानीय व्यवसाय प्रभावित होगा बल्कि परिवहन लागत और आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी नए सवाल खड़े होंगे।
वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि प्रशासन को इस संबंध में पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फर्म का चयन किन मानकों और शर्तों के आधार पर किया गया। जनचर्चा में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या निर्धारित फर्म द्वारा उपलब्ध कराया जाने वाला पशु आहार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पशु आहार की तुलना में सस्ता होगा और उसकी गुणवत्ता क्या होगी।
हालांकि विभागीय पत्र में यह अवश्य उल्लेख किया गया है कि आपूर्ति किया जाने वाला पशु आहार भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानक IS 2052:2023 के अनुरूप होना चाहिए तथा प्रत्येक बैग पर उत्पाद संबंधी सभी आवश्यक विवरण अंकित होना अनिवार्य है।





