चकमार्ग पर काम न मिलने के खुलासे के बाद शुरू हुई खुदाई, ग्रामीण बोले ‘यह विकास नहीं, सबूत मिटाने की है कवायद
प्रमोद कुमार वर्मा
अम्बेडकरनगर (अवधी खबर)। कटेहरी विकासखंड की ग्राम पंचायत बेनीपुर में मनरेगा कार्यों में कथित भ्रष्टाचार का मामला उजागर होने के बाद प्रशासन और पंचायत तंत्र में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि मीडिया में मामला सामने आते ही ग्राम प्रधान ने आनन-फानन में मजदूर लगाकर चक मार्ग पर कुछ दूरी तक काम शुरू करा दिया, ताकि पहले से दर्ज मनरेगा कार्यों की पोल खुलने से बचा जा सके।
ग्रामीणों के अनुसार, रमेश यादव के खेत से सूर्यकांत के खेत तक चक मार्ग निर्माण का कार्य मनरेगा पोर्टल पर पहले से संचालित दिखाया जा रहा था। पोर्टल पर मजदूरों की उपस्थिति और भुगतान संबंधी विवरण दर्ज थे, लेकिन मौके पर न तो कोई निर्माण कार्य दिखाई पड़ा था और न ही मजदूर काम करते मिले थे। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जी मस्टर रोल की आशंका गहरा गई थी।
मामला सार्वजनिक होने के बाद अब उसी स्थान पर जल्दबाजी में कुछ दूरी तक कार्य कराए जाने से ग्रामीणों के संदेह और बढ़ गए हैं। उनका कहना है कि यदि वास्तव में कार्य पहले से चल रहा था तो खबर प्रकाशित होने के बाद अचानक मजदूर लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मनरेगा पोर्टल पर कार्य प्रगति पर दिखाया जा रहा था, तब जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल अलग क्यों थी? क्या सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज मजदूर वास्तव में काम कर रहे थे या फिर कागजों पर ही विकास की इबारत लिखी जा रही थी?
मामले पर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) ने बताया कि शिकायत उनके संज्ञान में है और जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। वहीं जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) ने भी प्रकरण को गंभीर बताते हुए डीसी मनरेगा को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मामला उजागर होने के बाद भी दो दिनों तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचते तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती थी।
अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि जांच में अनियमितताएं और भ्रष्टाचार सिद्ध होता है तो न केवल दोषियों पर कार्रवाई होगी, बल्कि सरकारी धन की रिकवरी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी बड़ा मुद्दा बन सकती है।




