पैतृक आबादी पर कब्जे के विरोध में पूर्व में महिला का तोड़ चुके हैं हाथ, अब फिर पैर तोड़ने व जान से मारने की धमकी

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अकबरपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत लोहरा बरामदपुर के मजरे सुरुआरपुर का मामला

प्रमोद कुमार वर्मा

अम्बेडकरनगर(अवधी खबर)। महरुआ थाना क्षेत्र के लोहरा बरामदपुर के मजरे सुरुआरपुर की रहने वाली एक महिला ने अपनी पैतृक आबादी की जमीन बचाने के लिए प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता का आरोप है कि जमीन पर अवैध कब्जे का विरोध करने पर विपक्षियों ने पहले उसकी बेरहमी से पिटाई कर उसका हाथ तोड़ दिया और अब दोबारा पैर व जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। मामले में पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

पीड़िता रीता देवी पत्नी रामधीरज के अनुसार, गांव के ही चिंताराम पुत्र रामशरण ने प्रधान निधि से बनी नाली को पाटकर उस पर अवैध कब्जा कर लिया। इसके बाद उसकी पैतृक आबादी की भूमि, जहां उसने केले सहित अन्य पौधे लगा रखे थे, उस पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया जाने लगा। इस संबंध में उसने 16 मई 2026 को अकबरपुर तहसील जा कर संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराते हुए प्रशासन से भूमि की पैमाइश और कार्रवाई की मांग की थी।

पीड़िता का कहना है कि 24 मई 2026 को भूमि की पैमाइश प्रस्तावित थी, लेकिन उससे पहले ही सुबह करीब सात बजे विपक्षी पक्ष ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमले में उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया, जबकि बीच-बचाव करने पहुंची उसकी बेटी के साथ भी मारपीट की गई। उसके साथ अश्लील हरकत भी की गई कपड़े भी फाड़ दिए गए। घटना का वीडियो बनाने के दौरान मोबाइल भी तोड़ दिया गया।

महिला ने यह आरोप लगाया कि बेहोशी की हालत में उसे महरुआ थाने ले जाया गया, जहां होश में आने के बाद दी गई उसकी मूल तहरीर के बजाय दूसरी तहरीर लिखवाकर मुकदमा दर्ज किया गया। इतना ही नहीं, हल्का सिपाही पर भी विपक्षियों से मिलीभगत कर पैतृक आबादी की जमीन पर जबरन पिलर लगवाने का आरोप लगाया है।

पीड़िता का कहना है कि जिस भूमि पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है, वहां से विपक्षी का घर काफी दूर है और बीच में खड़ंजा मार्ग भी मौजूद है। इसके बावजूद दबंग कब्जे की नीयत से लगातार दबाव बना रहे हैं। अब धान की रोपाई के बाद फिर से हाथ-पैर तोड़ने और जमीन पर हस्तक्षेप न करने की धमकी दी जा रही है।

रीता देवी अपनी बेटी के साथ पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी से लगातार न्याय की गुहार लगा रही हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो कोई बड़ी अप्रिय घटना हो सकती है।

अब सवाल यह है कि क्या तहसील प्रशासन पैतृक आबादी की भूमि पर कथित कब्जे के प्रयास की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर उसे न्याय दिलाएंगे? फिलहाल पूरा मामला जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा में है।


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