शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष विवेचना नहीं करने का भी लगाया आरोप
हाईकोर्ट में कथित तौर पर मृतका को मानसिक रोगी बताते हुए याचिका दायर कर बचने की फिराक में, आज तक नहीं हुआ है मानसिक रोग का इलाज : शिकायतकर्ता
अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)। बहन की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने और विवेचना में लापरवाही का आरोप लगाते हुए मृतका के भाई हरिनाथ पुत्र स्व. अच्छे लाल, निवासी ग्राम रिउना, थाना भीटी ने पुलिस उपमहानिरीक्षक को शिकायती पत्र देकर निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक उसकी बहन की शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा कथित रूप से प्रताड़ित किया जाता था। 9 अगस्त 2026 को उसकी बहन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। हरिनाथ ने आशंका जताई है कि घटना को छिपाने के लिए उसकी बहन की मौत को फांसी का रूप दिया गया। मामले में अकबरपुर कोतवाली में भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 व 108 के तहत चार नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।
हरिनाथ का आरोप है कि घटना के करीब 15 दिन बीत जाने के बावजूद मुख्य आरोपी से प्रभावी पूछताछ अथवा गिरफ्तारी नहीं की गई। उनका कहना है कि मृत्यु से पहले उनकी बहन ने अपनी भाभी को फोन कर ससुराल पक्ष द्वारा कथित प्रताड़ना की जानकारी दी थी। दोनों के बीच हुई बातचीत से संबंधित विवरण और स्क्रीनशॉट भी उनके पास सुरक्षित होने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नामजद आरोपियों और कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा फोन तथा मुलाकात के माध्यम से मुकदमे में समझौता करने का कथित दबाव बनाया जा रहा है। हरिनाथ के अनुसार इस संबंध में उन्होंने पुलिस अधीक्षक को 14 और 18 अगस्त को भी सूचना दी थी।
वहीं, विवेचक संतोष कुमार सिंह पर भी शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष विवेचना नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने डीआईजी से मामले की जांच किसी अन्य अधिकारी, क्षेत्राधिकारी स्तर के अधिकारी अथवा अपराध शाखा से कराने की मांग की है। साथ ही महत्वपूर्ण मोबाइल फोन अभिलेख एवं अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित कराने तथा मृतका के परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
मानसिक बीमारी के दावे पर भी उठाए सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, दूसरी ओर विपक्षी पक्ष ने अपने बचाव के लिए हाईकोर्ट की शरण ली है और कथित तौर पर मृतका को मानसिक रोगी बताते हुए याचिका दायर की गई है। हरिनाथ का आरोप है कि अब तक मृतका के मानसिक उपचार से संबंधित कोई चिकित्सकीय पर्चा या इलाज का अभिलेख मौके पर उपलब्ध नहीं कराया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष द्वारा एक सप्ताह का समय मांगकर कथित रूप से मृतका के मानसिक उपचार से संबंधित दस्तावेज तैयार कराने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। हरिनाथ का कहना है कि उनकी बहन का मानसिक बीमारी को लेकर कहीं कोई इलाज नहीं हुआ था। यदि हाईकोर्ट में ऐसा कोई चिकित्सकीय दस्तावेज प्रस्तुत किया जाता है तो वह उसकी भी गहन जांच कराने की मांग करेंगे कि दस्तावेज किस चिकित्सक अथवा संस्थान द्वारा और किन परिस्थितियों में जारी किया गया।
पीड़ित पक्ष ने पूरे मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। मामले में पुलिस की जांच और न्यायालय की कार्यवाही के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




