“भारत मां के सपूत हैं हम,दुश्मन को सबक सिखाएंगे”

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ठान लिया है प्रण जो हमने,उसे अवश्य निभाएंगे,
भारत मां के सपूत हैं हम,दुश्मन को सबक सिखायेंगे।।
जो मानवता का दुश्मन कहलाता है,
जो दहशतगर्दी फैलता है,
जो माताओं-बहनों का सिंदूर मिटाता है,
उस बेहुदे के घर में घुसकर हम,सिंदूर की कीमत बतायेंगे,
भारत मां के सपूत हैं हम,दुश्मन को सबक सिखायेंगे।।
हमारा पड़ोसी जिसे कहते हैं पाक,
है वो बहुत नापाक।
जाने क्यों कुरेदता है,हमारे जज्बात,
वो मत भूले अपनी औकात।
हम तो हैं उसके बाप,
जब चाहेंगे उसे देंगे नाप।
हिंद के जवान जब अपने पर आ जायेंगे,
तो इस्लामाबाद और कराची आबाद नहीं रह पायेंगे।
भारत मां के सपूत हैं हम,दुश्मन को सबक सिखायेंगे।।
चीनियों में चीनी कम है,
पाकिस्तानियों में अहम।
हिन्दुस्तानियों में रहम है,
“छेड़ोगे तो छोड़ेगे नहीं”
भारतीयों में इस बात का भरपूर दम है।।
आतंकी ठिकानों पर,बारूद हम बरसायेंगे,
भारत मां के सपूत हैं हम,दुश्मन को सबक सिखायेंगे।।
सुन लो पाकिस्तान !,
तुम्हारी गीदड़ धमकियों से हिंद नहीं होगा हैरान।
बंद कर लो तुम आतंक की दुकान,
वर्ना मिटा देंगे नक्शे से,
तुम्हारा नामो-निशान।।
मानवता पर हमला हम बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे,
भारत मां के सपूत हैं हम,दुश्मन को सबक सिखायेंगे।।
ये देश है मेहनती किसानों का,
ये देश है दमदार दीवानों का,
ये देश है हिंदू और मुसलमानों का,
ये देश है वीर जवानों का,
इस देश के दुश्मनों को मिट्टी में मिलायेंगे,
भारत मां के सपूत हैं हम,दुश्मन को सबक सिखायेंगे।।
जन-जन में जहाँ इन्कलाब है,
वो भारत जिन्दाबाद है,
समानता यहाँ आबाद है,
धर्म यहाँ आजाद है,
वहाँ धर्म निरपेक्षता का ध्वज हम लहराएंगे,
भारत मां के सपूत हैं हम,
तिरंगा गर्व से फहरायेंगे।।
दीवानों ने जहाँ प्राण लुटाया,
राणा से जहाँ शत्रु थर्राया,
बुद्ध ने जहाँ ज्ञान सिखाया,
गांधी ने जहाँ सत्य बताया,
भीम ने जहाँ संविधान बनाया,
उस धरा को हम सशक्त बनाएंगे,
भारत मां के सपूत हैं हम,तिरंगा गर्व से फहरायेंगे।।
जहाँ हरिश्चंद्र और तारा है,
जहां अब्दुल कलाम एक सितारा है,
जहां बहती गंगा-जमुनी धारा है,
जहां पोरस ने सिकन्दर को ललकारा है,
जहाँ हर आक्रांता हारा है,
“जहां जय-जवान, जय-किसान” इक नारा है,
जहाँ हिमालय सबको प्यारा है,
उस धरा को हम बचाएंगे,
भारत मां के सपूत हैं हम,दुश्मन को सबक सिखायेंगे।।
हिंद ने जिसे तराशा है,
जिसमें नहीं निराशा है,
स्वाभिमान जिसकी अभिलाषा है,
वो फौज हमारी आशा है।
दुश्मन जो लहू का प्यासा है,
दिखाना उसे तमाशा है।
हमें प्यार जताना आता है,
हमें आंख दिखाना भी आता है।
हमें नाम मिटाना आता है,
हमें मिट्टी में मिलाना आता है।
हम नाम अमर कर जाएंगे,
भारत मां के सपूत हैं हम,दुश्मन को सबक सिखायेंगे।
भारत मां के सपूत हैं हम,तिरंगा गर्व से फहरायेंगे।।

डॉ० अजय वर्मा ‘अजेय’


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