अम्बेडकर जैसे विचारकों ने सामाजिक परिवर्तन के लिए बौद्ध विचार का प्रभावी उपयोग किया- जयचन्द

Spread the love

सामाजिक न्याय के लिए बौद्ध धर्म की प्रासंगिकता निर्विवाद-डॉ. जयचन्द

अवधी खबर संवाददाता

अंबेडकरनगर। जिला मुख्यालय स्थित बी.एन.के.बी.पी.जी. कॉलेज अकबरपुर
एवं अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय  ‘बुद्ध-पथ-प्रदीप’ कार्यशाला के पंचम दिवस पर बौद्ध विचार पर आधारित योग-प्राणायाम और बौद्धिक सत्र का आयोजन हुआ। अवकाश के उपरांत पंचम दिवस का शुभारंभ दीप-प्रज्ज्वलन एवं बुद्ध वंदना के साथ हुआ। योग-प्राणायाम के लिए प्रशिक्षक दानिश रिज़वी और बौद्धिक सत्र में प्रांतीय शिक्षा सेवा संवर्ग के अंतर्गत पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय इंटर कॉलेज, पहितीपुर खजूरडीह के प्रधानाचार्य के रूप में कार्य कर रहे डॉ. जयचन्द ने मुख्य वक्ता के रूप में ‘सामाजिक न्याय और बौद्ध धर्म’ विषय पर विचार रखे।

मुख्य वक्ता का स्वागत महाविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ. अनिल कुमार और कार्यशाला संयोजक डॉ. शशांक मिश्र ने बुके देकर किया।
मुख्य वक्ता डॉ. जयचन्द ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बौद्ध धर्म सामाजिक न्याय से गहराई से जुड़ा है, क्योंकि यह समानता, करुणा और अहिंसा को बढ़ावा देता है। बुद्ध ने जाति, वर्ग, लिंग भेदभाव को नकारते हुए सभी को समान माना और संघ में सभी को शामिल किया। बौद्ध धर्म का दर्शन सामाजिक न्याय के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है, क्योंकि यह समानता, करुणा, और अहिंसा को बढ़ावा देता है।

आंबेडकर जैसे विचारकों ने इसे सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रभावी ढंग से उपयोग किया। हालांकि, बौद्ध धर्म को सामाजिक न्याय के लिए लागू करने में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों को समझना आवश्यक है। करुणा की शिक्षा सामाजिक असमानता, गरीबी और उत्पीड़न को दूर करने में सहायक है। अहिंसा का सिद्धांत सामाजिक हिंसा और संघर्ष को रोकने में मदद करता है, शांतिपूर्ण समाधान को प्रोत्साहित करता है। भारत में डॉ. आंबेडकर ने नव-बौद्ध आंदोलन के माध्यम से दलितों को जातिगत उत्पीड़न से मुक्ति के लिए बौद्ध धर्म को अपनाया। वैश्विक स्तर पर थाईलैंड, श्रीलंका, तिब्बत में बौद्ध भिक्षु सामाजिक सुधार, पर्यावरणीय न्याय, मानवाधिकार के लिए सक्रिय हैं।

सामाजिक न्याय के लिए बौद्ध धर्म की प्रासंगिकता निर्विवाद है। कार्यशाला संयोजक डॉ. शशांक मिश्र ने मुख्य अतिथि और शिक्षकों का स्वागत करते हुए कहा कि सभी धर्मों और विचारों के मूल में मनुष्य का कल्याण और मानवतावादी विचार निहित है। बौद्ध धर्म भी अपने समय-काल में इन्हीं विचारों के लिए संघर्ष कर रहा था। आधुनिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में शोषण पर आधरित सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध बौद्ध धर्म मानवता और अहिंसावादी विचारों के कारण महत्त्वपूर्ण हो जाता है।


कार्यशाला का प्रथम सत्र बुद्ध विचार पर आधारित योग-प्राणायाम का रहा है, जिसमें प्रतिभागियों ने प्रशिक्षक दानिश रिज़वी के नेतृत्व में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का संचालन लेफ्टिनेंट डॉ. विवेक तिवारी द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम सह संयोजक डॉ. बृजेश कुमार रजक, आशीष कुमार चतुर्वेदी, वागीश शुक्ल समेत कार्यशाला में आदित्य, आनंद शुक्ला, श्वेता सिंह अवंतिका पांडे, आकर्षा तिवारी, आयुष श्रीवास्तव, आनंद शर्मा आदि प्रतिभागी सम्मिलित रहे।


Spread the love

Related Posts

27 सितंबर को गरजेगा सपा का संगठन, टाण्डा में जुटेंगे कार्यकर्ता

Spread the love

Spread the loveप्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल होंगे मुख्य अतिथि, विधायक राममूर्ति वर्मा ने भरी कार्यकर्ताओं में जोश अवधी खबर संवाददाता टांडा, अम्बेडकरनगर। समाजवादी पार्टी ने आगामी 27 सितंबर को…


Spread the love

अम्बेडकरनगर की बेटी बबिता वर्मा ने बढ़ाया जिले का मान, उच्च शिक्षा विभाग में बनीं कुलसचिव

Spread the love

Spread the loveअवधी खबर संवाददाता अम्बेडकरनगर,(बृजेश कुमार चौधरी)। जलालपुर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत कन्नूपुर निवासी बबिता वर्मा ने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर जिले का नाम रोशन…


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *