शिक्षा विभाग में बड़ा खेल, बच्चों के भविष्य से हो रहा खिलवाड़

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ज्ञान भारती विद्यापीठ जूं. हाई स्कूल मथुरा रसूलपुर का मामला

अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकर नगर।
जनपद के खंड शिक्षा क्षेत्र भियांव में संचालित ज्ञान भारती विद्यापीठ जूं हाई स्कूल मथुरा रसूलपुर को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जनसूचना के आधार पर सामने आई जानकारी ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मान्यता प्राथमिक विद्यालय की, नाम जूनियर हाईस्कूल का

जनसूचना से यह स्पष्ट हुआ है कि विद्यालय की मान्यता केवल प्राथमिक विद्यालय के नाम पर है, जबकि स्कूल का संचालन जूनियर हाईस्कूल के नाम से किया जा रहा है। यह नियमों के विपरीत है और विभागीय लापरवाही का बड़ा उदाहरण है।

केवल सहायक अध्यापक के सहारे विद्यालय

विद्यालय में न कोई प्रधानाध्यापक है, न चपरासी और न ही कोई लिपिक। विद्यालय का संचालन केवल सहायक अध्यापक के भरोसे हो रहा है। बड़ा सवाल यह है कि जब विद्यालय में प्रधानाध्यापक ही नहीं है तो सहायक अध्यापक को दिशानिर्देश कौन देता है?

पोस्टर गवाही देते हैं झूठ की

विद्यालय के बाहर और आसपास लगाए गए पोस्टरों में प्रधानाध्यापक का नाम और तस्वीर दर्शायी जाती है, जबकि जनसूचना बताती है कि विद्यालय में प्रधानाध्यापक नियुक्त ही नहीं है। इससे साफ जाहिर होता है कि बच्चों और अभिभावकों को गुमराह किया जा रहा है।

मांगी गई सूचना, मिली दूसरी

जानकारी यह भी सामने आई है कि मांगी गई थी जी.बी.वी.पी. एकेडमी की जनसूचना, जो कि अंग्रेज़ी माध्यम का विद्यालय है। मगर विभाग की ओर से जो सूचना दी गई वह हिंदी माध्यम विद्यालय की निकली। यह शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गहरे सवाल उठाता है।

शिक्षा अधिकारी की भूमिका संदिग्ध

पूरा मामला इस ओर इशारा करता है कि यह विद्यालय खंड शिक्षा अधिकारी भियांव की शह पर चल रहा है। क्योंकि सूचना भी उन्हीं के कार्यालय से जारी की गई है। विभाग की यह भूमिका बेहद संदिग्ध प्रतीत होती है।

उठते हैं गंभीर सवाल

मान्यता प्राथमिक विद्यालय की और मोहर जूनियर हाईस्कूल की कैसे? बिना प्रधानाध्यापक के विद्यालय कैसे चल रहा है?पोस्टरों में प्रधानाध्यापक का नाम क्यों दिखाया जा रहा है? मांगी गई अंग्रेज़ी माध्यम की सूचना के बदले हिंदी माध्यम का जवाब क्यों दिया गया? क्या खंड शिक्षा अधिकारी और विभागीय अधिकारी इस खेल में शामिल हैं? जनसूचना के आधार पर साफ है कि शिक्षा विभाग की लापरवाही और मिलीभगत से बच्चों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है। ऐसे मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराकर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि शिक्षा व्यवस्था पर जनता का विश्वास कायम रह सके।


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