आंगनबाड़ी केंद्र की मरम्मत में घटिया काम, बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

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अम्बेडकर नगर
विकास खंड बसखारी के ग्राम सभा बेला परसा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर पंचायत राज विभाग की ओर से हाल ही में ₹2,59,312 की लागत से मरम्मत कार्य कराया गया। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद केंद्र पर कार्यकत्री और स्थानीय ग्रामीणों ने जब इसकी स्थिति देखी तो यह सामने आया कि खर्च की गई बड़ी धनराशि के बावजूद केंद्र की दशा जस की तस बनी हुई है। कार्यकत्री ने आरोप लगाया कि यह कार्य पूरी तरह से घटिया गुणवत्ता वाला है और बच्चों की सुरक्षा व स्वास्थ्य पर संकट खड़ा कर रहा है।

आंगनबाड़ी कार्यकत्री दुर्गावती का कहना है कि ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव ने किसी की राय नहीं ली और मनमानी तरीके से मरम्मत कार्य कराया। इसके कारण कई गंभीर खामियां सामने आई हैं।

एक शौचालय का मरम्मत तो कराया गया, लेकिन पानी निकालने की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिससे बच्चों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। दूसरा शौचालय छत की चहारदीवारी पर बनवा दिया गया, जिसका उपयोग करना संभव ही नहीं है।

केंद्र की छत में लगाए गए सामान मरम्मत के बाद भी उखड़ने लगे हैं, जो किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं।सफाई की स्थिति बेहद खराब है। सफाईकर्मी महीने में केवल एक बार आता है और फोटो खिंचवाकर चला जाता है।बिजली के तार इधर-उधर बिखरे हुए हैं, जिससे बच्चों की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है।

आंगनबाड़ी केंद्र में 3 से 6 वर्ष तक के नौनिहाल शिक्षा व पोषण कार्यक्रमों के लिए आते हैं। ऐसे में केंद्र की खराब स्थिति बच्चों के लिए सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों ही दृष्टिकोण से खतरनाक है। कार्यकत्री ने यह भी बताया कि मरम्मत की खामियों और केंद्र की दयनीय स्थिति के बारे में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग को लिखित सूचना दी जा चुकी है।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों और कार्यकत्री का आरोप है कि ग्राम प्रधान और सचिव को न तो सरकार का डर है और न ही प्रशासन का। ऐसे में सवाल उठता है कि शासन-प्रशासन कब तक आंख मूंदे रहेगा? क्या इस मामले में जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी कागजों में दबाकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

यह पूरा प्रकरण न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग को उजागर करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए कोई ठोस तंत्र नहीं है। यदि ऐसे मामलों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो योजनाओं का लाभ आमजन और खासकर बच्चों तक नहीं पहुंच पाएगा।


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