समाजसेवी कार्यकर्ता अमित मांझी ने उठाया सवाल: बिना शासनादेश कैसे बदला गया आयुर्वेदिक चिकित्सालय का नाम, तीसरे नामकरण पर भी संदेह

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आलापुर (अम्बेडकरनगर)।
आलापुर स्थित श्रीमती गायत्री देवी राजकीय संयुक्त आयुर्वेदिक चिकित्सालय एक बार फिर नामकरण को लेकर विवादों में है। गौरतलब है कि इस चिकित्सालय का उद्घाटन 7 मई 1995 को तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा द्वारा किया गया था। यह अस्पताल आलापुर के विकास पुरुष स्वर्गीय सालिक राम शुक्ला के सहयोग से स्थापित हुआ था और उनकी पूजनीय माता श्रीमती गायत्री देवी के नाम पर इसका नामकरण किया गया था।

विगत वर्ष आयुष विभाग द्वारा बिना किसी स्पष्ट शासनादेश के चिकित्सालय का नाम बदलकर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, आलापुर, अम्बेडकर नगर कर दिया गया। इस नाम परिवर्तन का खुलासा समाजसेवी एवं पत्रकार अमित मांझी द्वारा मांगी गई जनसूचना (RTI) के माध्यम से हुआ, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि नाम परिवर्तन के संबंध में कोई विधिवत शासनादेश जारी नहीं किया गया था।

जैसे ही यह मामला प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, आयुष विभाग में हड़कंप मच गया। इसके बाद आनन-फानन में चिकित्सालय का तीसरा नामकरण कर दिया गया। अब इसका नाम रखा गया है—
श्रीमती गायत्री देवी आयुष्मान आरोग्य मंदिर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, आलापुर, अम्बेडकर नगर।
यह नाम पूर्व और वर्तमान दोनों नामों का मिश्रण प्रतीत होता है, जिसने विवाद को और गहरा कर दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यह तीसरा नामकरण किसी विधिवत शासनादेश के तहत किया गया है या फिर यह केवल विभागीय दबाव में लिया गया तात्कालिक फैसला है। इसके साथ ही नाम परिवर्तन के चलते अस्पताल की मोहर, बोर्ड, रंगाई-पुताई, स्टेशनरी एवं अन्य शासकीय सामग्री में हुए बदलाव से हुई संभावित राजस्व हानि की जिम्मेदारी किसकी होगी—यह भी एक अहम प्रश्न बना हुआ है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना शासनादेश के अस्पताल का नाम बदलना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह आलापुर के विकास पुरुष स्वर्गीय सालिक राम शुक्ला की विरासत और भावना को ठेस पहुंचाने वाला कदम भी है। उन्हीं के प्रयासों से आलापुर एक छोटे से गांव से आगे बढ़कर तहसील, थाना, राजकीय इंटर कॉलेज, राजकीय महाविद्यालय, आईटीआई और यहां तक कि विधानसभा क्षेत्र के रूप में पहचान बना सका।

इस पूरे मामले पर समाजसेवी एवं अवधी खबर के संवाददाता अमित मांझी का कहना है कि तीसरा नामकरण भी पूरी तरह उचित नहीं है और जब तक शासनादेश स्पष्ट रूप से सामने नहीं आता, तब तक विवाद समाप्त नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि वे अस्पताल के मूल नाम ‘श्रीमती गायत्री देवी राजकीय संयुक्त आयुर्वेदिक चिकित्सालय’ को बहाल कराने के लिए अपना प्रयास जारी रखेंगे।

फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयुष विभाग इस मामले में कोई स्पष्ट शासनादेश प्रस्तुत करता है या फिर बिना शासनादेश नाम बदलने वालों पर विभागीय कार्रवाई होती है। आने वाला समय ही तय करेगा कि इस पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी किस पर तय होती है।


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