अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर ( प्रमोद वर्मा)।
नगर कोतवाली अकबरपुर क्षेत्र में विवादित जमीनों पर अवैध कब्जा कराने को लेकर पुलिस की भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कहीं बुलडोजर की कार्रवाई तो कहीं नगर पालिका की इंटरलॉकिंग के बगल बनी सरकारी नाली पर ही अवैध निर्माण कराए जाने के आरोप सामने आए हैं। इन मामलों में पुलिस की कथित अहम भूमिका को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

ताजा मामला अकबरपुर कोतवाली अंतर्गत मरैला जेल चौकी क्षेत्र के लोरपुर ताजन गांव का है, जहां विगत माह यासमीन बानो नामक पीड़िता ने जिलाधिकारी से शिकायत कर आरोप लगाया था कि गांव के कुछ दबंग पुलिस की मौजूदगी में उनके दरवाजे के ठीक सामने जबरन दीवार का निर्माण करा रहे हैं। पीड़िता ने उस समय पूरी घटना का वीडियो भी अपने मोबाइल में रिकॉर्ड किया था, जिसमें पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद नजर आ रहे हैं।
आरोप है कि रविवार को एक बार फिर जेल चौकी पुलिस और राजस्व कर्मी पीड़िता के घर पहुंचे और एक पक्ष को खुला संरक्षण देते हुए दूसरे पक्ष को जमकर फटकार लगाई। पीड़िता का कहना है कि पुलिसकर्मियों ने जाते समय विपक्षियों से कहा कि “हम लोगों के जाने के बाद दरवाजे के सामने दीवार खड़ी कर देना। पीड़िता ने नगर पालिका द्वारा पास कराए गए मकान के नक्शे को भी मौके पर मौजूद कर्मचारियों को दिखाया, लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी।
इसके बाद कथित तौर पर विपक्ष की महिलाएं इकट्ठा हुईं और लेबर व मिस्त्री बनकर नगर पालिका द्वारा बनाई गई सरकारी नाली पर ही दीवार की चुनाई शुरू कर दी। जब पीड़िता यासमीन बानो ने अपने दरवाजे के सामने दीवार बनते देख इसका विरोध किया तो आरोप है कि चौकी इंचार्ज के कथित संरक्षण में उपद्रवी महिलाओं ने पीड़िता के साथ जमकर मारपीट की।
पीड़िता का यह भी आरोप है कि जब वह शिकायत दर्ज कराने कोतवाली अकबरपुर पहुंची तो वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने उसका शिकायती पत्र तक लेने से इनकार कर दिया। पीड़िता का कहना है कि यह वही कोतवाली है जहां पुलिस की मौजूदगी में न्यायालय में विचाराधीन मकान पर बुलडोजर चला दिया जाता है।
इतना ही नहीं, क्षेत्र में चोरी की बाइक को वाहन स्वामी को वापस करने के एवज में मुखबिर के नाम पर 10 से 15 हजार रुपये की मांग किए जाने जैसे आरोप भी सामने आते रहे हैं। इन तमाम घटनाओं ने पुलिस की कार्यशैली और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।