वन दरोगा की मिलीभगत से सागौन कटान का आरोप, पुलिस भी घेरे में

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अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)।
जनपद के भीटी ब्लॉक अंतर्गत मिझौड़ा गांव में सागौन के बहुमूल्य पेड़ों की अवैध कटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने अब सीधे तौर पर वन विभाग के क्षेत्रीय वन दरोगा पर ठेकेदार से मिलीभगत कर कटान कराने का गंभीर आरोप लगाया है। दो दिनों तक दिनदहाड़े चली आरा की आवाज और ट्रैक्टर-ट्रॉली से लकड़ी की ढुलाई के बावजूद न तो वन विभाग सक्रिय दिखा और न ही स्थानीय पुलिस ने हस्तक्षेप किया।


ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो दर्जन से अधिक सागौन के विशाल पेड़ों को योजनाबद्ध तरीके से कटवाया गया। गांव के उत्तर तरफ स्थित कैलाश लाला के बाग से कटान करने की बात सामने आई है।लकड़ी खुलेआम गांव की सड़कों से बाहर ले जाई गई, लेकिन किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने रोकने या जब्ती की कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि बिना वन दरोगा की जानकारी और सहमति के इतने बड़े पैमाने पर सागौन कटान संभव नहीं है।


सूत्रों का दावा है कि ठेकेदार और वन दरोगा के बीच पहले से “सेटिंग” थी, जिसके चलते अवैध कटान को हरी झंडी दी गई। यही वजह रही कि वन विभाग की ओर से मौके पर न तो मुआयना किया गया और न ही लकड़ी की वैधता संबंधी कोई दस्तावेज सार्वजनिक किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय स्तर पर लीपापोती की कोशिश की जा रही है।


स्थानीय पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। कटान और ढुलाई के दौरान दो थानों भीटी व अहिरौली की पुलिस की निष्क्रियता से मिलीभगत की आशंका और गहरा गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि वन दरोगा और पुलिस सक्रिय रहते तो यह ‘हरी लूट’ रोकी जा सकती थी।


मामला केवल मिझौड़ा तक सीमित नहीं बताया जा रहा। जैतपुर खास गांव में भी आम के पेड़ों की अवैध कटाई की चर्चाएं तेज हैं। लगातार हो रही हरित संपदा की चोरी से क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है। पर्यावरण जानकारों का कहना है कि प्रतिबंधित सागौन जैसे बहुमूल्य और दीर्घजीवी पेड़ों की कटाई से न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है, बल्कि जलस्तर और वर्षा चक्र पर भी दीर्घकालिक दुष्प्रभाव पड़ता है।


ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच कराई जाए, संबंधित वन दरोगा व पुलिस कर्मियों की भूमिका की जांच हो, दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर अवैध लकड़ी जब्त की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘हरी लूट’ पर सख्ती दिखाता है या फिर मामला कागजों में ही सिमट कर रह जाएगा।


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