अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर।
भीटी विकासखंड में विकास कार्यों की तकनीकी निगरानी को लेकर असंतुलित व्यवस्था सामने आई है। जानकारी के अनुसार ब्लॉक की 92 ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त और पंद्रहवां वित्त आयोग के तहत कराए जा रहे निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी मात्र एक कंस्ट्रक्शन जूनियर इंजीनियर के पास है।
नाली, खड़ंजा, इंटरलॉकिंग, पंचायत भवन और अन्य निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच, माप पुस्तिका सत्यापन और भुगतान संस्तुति जैसे अहम दायित्व एक ही अधिकारी पर केंद्रित हैं। इतने बड़े दायरे में एकमात्र जेई द्वारा सभी कार्यों का भौतिक सत्यापन कर पाना व्यवहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत होने वाले कार्यों के लिए 5 से 7 तकनीकी सहायक (टीए) तैनात हैं, जो कार्यों की निगरानी करते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मनरेगा कार्यों के लिए अलग से कई तकनीकी सहायक मौजूद हैं, तो राज्य वित्त और 15वें वित्त के व्यापक कार्यों के लिए केवल एक जेई पर निर्भर रहना कितना उचित है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस असंतुलन के कारण निरीक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जिससे गुणवत्ता और पारदर्शिता पर असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने मांग की है कि 92 ग्राम पंचायतों के व्यापक कार्यभार को देखते हुए अतिरिक्त तकनीकी अधिकारियों की तैनाती की जाए, ताकि विकास कार्यों की निगरानी प्रभावी और निष्पक्ष रूप से हो सके।




