अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर (अमित मांझी)। जनपद के अम्बेडकरनगर के अकबरपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा अशरफपुर पखवाड़े में मनरेगा के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव में जमीनी स्तर पर कोई कार्य होते नहीं दिख रहा, लेकिन मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट पर आठ मास्टर रोल में कुल 79 मजदूरों के कार्यरत होने का उल्लेख दर्ज है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मौके पर किसी भी प्रकार का निर्माण या विकास कार्य नहीं चल रहा है। इसके बावजूद वेबसाइट पर दर्ज आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि बड़ी संख्या में मजदूरों को काम दिया गया है। इतना ही नहीं, आरोप है कि एक ही व्यक्ति की फोटो को कई मास्टर रोल में अपलोड किया गया है, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। नियमानुसार एक मजदूर एक समय में केवल एक ही कार्यस्थल पर दर्ज हो सकता है।
जब इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कॉल काट दी। इसके बाद विकास खंड अधिकारी को सूचना दी गई, किंतु दोबारा संपर्क करने पर उनका फोन भी रिसीव नहीं हुआ। संबंधित अधिकारियों की चुप्पी मामले को और संदिग्ध बना रही है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब जिले के जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला वित्तीय अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई करते हुए कई प्रधानों की वित्तीय शक्तियां सीज कर चुके हैं। जिलाधिकारी की साफ-सुथरी प्रशासनिक छवि और पारदर्शिता के प्रयासों के बीच मुख्यालय स्थित विकासखंड में ही मनरेगा कार्यों में कथित अनियमितता प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि यदि बिना कार्य कराए मजदूरी का भुगतान किया गया है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आएगा। इस पूरे प्रकरण में ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान, एपीओ मनरेगा, डीसी मनरेगा तथा खंड विकास अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बिना जमीनी कार्य के सरकारी धन निकाला जा रहा है? यदि वेबसाइट पर दर्ज आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
जनपद में पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में चल रही मुहिम के बीच अशरफपुर पखवाड़े का यह मामला प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा बन सकता है। अब निगाहें जिलाधिकारी के अगले कदम पर टिकी हैं।


