चर्चित मंशाराम हत्याकांड! पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजय सिपाही समेत तीन दोषी करार, एक दोष मुक्त

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अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर। वर्ष 2016 में हुए चर्चित मंशाराम हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) रामविलास सिंह की अदालत ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख कटेहरी अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही समेत तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने मुलायम यादव, अजय यादव और अजय प्रताप सिंह को हत्या सहित अन्य धाराओं में दोष सिद्ध करते हुए जेल भेज दिया। सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 24 फरवरी की तिथि निर्धारित की गई है। वहीं आरोपी गिरेंद्र कुमार पांडेय को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।

सत्र परीक्षण के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुभाष चंद्र यादव ने गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराते हुए आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए और कठोर दंड की मांग की। सुनवाई के उपरांत अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया।

मामला 23 मार्च 2016 का है। सुल्तानपुर जिले के दोस्तपुर थाना क्षेत्र के किशनागरपुर गांव निवासी मंशाराम यादव को होली के दिन गांव के मुलायम यादव और अजय कुमार यादव अपने साथ महरुआ चलने की बात कहकर ले गए थे। देर शाम तक घर न लौटने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की। जानकारी मिली कि सभी लोग लोकनाथपुर गांव में एक दावत में गए हैं। खोजबीन के दौरान गोली चलने की सूचना मिली। अगले दिन सुल्तानपुर जिले के जयसिंहपुर थाना क्षेत्र स्थित भेवापार माइनर के पास एक शव मिलने की खबर आई। परिजनों ने मौके पर पहुंचकर शव की पहचान मंशाराम के रूप में की।


मृतक की बुआ चंद्रावती ने नामजद तहरीर देकर आरोप लगाया कि मुलायम यादव और अजय यादव ने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर मंशाराम की हत्या कर शव फेंक दिया। एक अन्य तहरीर में ओमप्रकाश यादव ने पुलिस उपमहानिरीक्षक फैजाबाद (अयोध्या) को बताया कि मंशाराम को ब्लॉक प्रमुख के नवनिर्मित आवास पर दावत के बहाने बुलाया गया, जहां गोली मारकर हत्या कर दी गई। बाद में शव को कपड़े में लपेटकर वाहन की डिग्गी में रख सुल्तानपुर जिले में फेक दिया।


मामला क्षेत्राधिकार के आधार पर सुल्तानपुर से महरुआ थाना स्थानांतरित किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने मुलायम यादव, अजय कुमार यादव, गिरेंद्र कुमार पांडेय और अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
अब अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने के बाद 24 फरवरी को सजा सुनाए जाने को लेकर पूरे क्षेत्र की निगाहें न्यायालय पर टिकी हैं।


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