अवैध कब्जे पर कार्रवाई नहीं, आदेशों पर धूल!

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आखिर कब चलेगा लापरवाह अधिकारियों पर हंटर?

अवधी खबर संवाददाता

अयोध्या। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा, न्याय और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जनपद अयोध्या के हैदरगंज थाना क्षेत्र स्थित पूरब पट्टी गांव का एक मामला इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। यहां एक महिला अपनी पैतृक जमीन से अवैध कब्जा हटवाने के लिए महीनों से राजस्व और पुलिस विभाग के चक्कर काट रही है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी निस्तारण और लीपापोती किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।

शिकायतकर्ता नीरजा पाण्डेय का आरोप है कि उनकी पैतृक भूमि गाटा संख्या 145 व 148 पर टिनशेड डालकर फास्ट फूड की दुकान संचालित की जा रही थी। राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच में कब्जा अवैध पाए जाने के बाद तत्कालीन उप जिलाधिकारी द्वारा कब्जा हटाने का आदेश भी पारित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद आज तक जमीन खाली नहीं कराई जा सकी।

पीड़िता का कहना है कि मूल विवाद दो पक्षों के बीच न्यायालय में विचाराधीन है, जबकि कब्जा तीसरे पक्ष द्वारा किया गया है, जिसका मुकदमे से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। इसके बावजूद प्रशासन बार-बार पुराने मुकदमे का हवाला देकर कार्रवाई से बचता रहा।

मामला बीकापुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत पूरब पट्टी पटखौली का है शिकायतकर्ता के अनुसार पूर्व में जिलाधिकारी स्तर से भी पुलिस बल के साथ कब्जा हटवाने के निर्देश दिए गए थे। राजस्व टीम और पुलिस मौके पर पहुंची भी, लेकिन कार्रवाई अधूरी छोड़ दी गई। पीड़िता का आरोप है कि पूर्व में रहे उप जिलाधिकारी द्वारा दिए गए आदेश को वर्तमान उप जिलाधिकारी ने मानने से इनकार कर दिया। यहां तक कि कथित रूप से यह तक कहा गया कि वह आदेश पुराना हो गया है, जब नया आदेश आएगा तब कार्रवाई की जाएगी।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने पुनः शिकायत कर न्याय की मांग की, तब उन्हें कथित रूप से यह कह दिया गया कि आप खुद ही कब्जा हटवा लो अगर कोई परेशानी हो तो बता देना। इस बयान के बाद प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

सबसे हैरानी की बात यह है कि संयुक्त जांच रिपोर्ट में स्वयं यह उल्लेख किया गया कि गाटा संख्या 148 के कुछ हिस्से पर विपक्षी द्वारा टिनशेड रखकर फास्ट फूड की दुकान संचालित की जा रही है। विपक्षी को अपनी खतौनी की भूमि में दुकान हटाने के लिए कहा गया, लेकिन वह तैयार नहीं हुए। इसके बावजूद प्रशासन ने अवैध कब्जा हटाने के बजाय केवल दोनों पक्षों पर धारा 126/135 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई कर मामले को शांति व्यवस्था तक सीमित कर दिया।

पीड़िता का आरोप है कि शिकायतों का निस्तारण केवल हवा-हवाई तरीके से किया जा रहा है। एक तरफ अधिकारी मौखिक रूप से कब्जा अवैध बताते हैं, दूसरी तरफ लिखित रिपोर्टों में ऐसे तथ्य जोड़ दिए जाते हैं जिससे वास्तविक कार्रवाई आगे न बढ़ सके।

अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जांच में कब्जा स्पष्ट पाया गया, आदेश भी पारित हुए और पुलिस बल की मांग भी की गई, तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आखिर क्यों नहीं चला बाबा का बुलडोजर? कब जागेंगे जिम्मेदार अधिकारी? और कब चलेगा लापरवाही करने वालों के खिलाफ प्रशासनिक हंटर?

स्थानीय लोगों में भी चर्चा है कि यदि जांच रिपोर्ट और प्रशासनिक आदेशों का पालन ही नहीं होना है, तो आम जनता न्याय के लिए आखिर किस पर भरोसा करे। पीड़ित पक्ष ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर कथित फर्जी एवं भ्रामक रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।


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