आयुर्वेदिक कार्यालय में कनिष्ठ लिपिक की मनमानी बरकरार, मीडिया की पड़ताल के बाद भी नहीं सुधरी कार्यशैली

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बुधवार को भी 10:40 बजे तक नहीं पहुंचे कार्यालय, कनिष्ठ लिपिक का वीआईपी ठाठ, किसी अधिकारी से कम नहीं, कुर्सी पर लगी तौलिया दे रही सबूत

अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)। जनपद के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी कार्यालय में कनिष्ठ लिपिक की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। मीडिया द्वारा कार्यालय की कार्यप्रणाली उजागर किए जाने के बाद भी स्थिति में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। बुधवार को की गई पड़ताल में सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक कनिष्ठ लिपिक प्रदीप कुमार मिश्रा कार्यालय नहीं पहुंचे, जिससे एक बार फिर विभागीय अनुशासन और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए।

इससे पहले भी मीडिया ने खुलासा किया था कि कनिष्ठ लिपिक बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के दोपहर 12 बजे से 2:20 बजे तक कार्यालय से गायब रहे थे। कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से उनकी अनुपस्थिति की पुष्टि की जा सकती है। समाचार प्रकाशित होने के बावजूद उनकी कार्यशैली में कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया।

जानकारी के अनुसार, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. रंजीत कुमार की प्रतिदिन सुबह 8 बजे से 12 बजे तक राम बाबा अस्पताल में ड्यूटी रहती है। ऐसे में अधिकारी अस्पताल चले जाते हैं और कार्यालय की जिम्मेदारी कनिष्ठ लिपिक के कंधों पर होती है। लेकिन जब वही कर्मचारी समय से कार्यालय न पहुंचे और अपनी सुविधा के अनुसार आए-जाए, तो कार्यालय की व्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।

कार्यालय में आने वाले लोगों का कहना है कि कनिष्ठ लिपिक के पद पर तैनात होने के बावजूद प्रदीप कुमार मिश्रा का कार्य करने का अंदाज किसी अधिकारी से कम नहीं दिखाई देता। उनकी कुर्सी पर स्थायी रूप से तौलिया लगा रहता है और कार्यालय में उनका रौब भी किसी अधिकारी जैसा नजर आता है। कई फरियादियों का कहना है कि कार्यालय में ऐसा माहौल दिखाई देता है मानो पूरे कार्यालय का संचालन कनिष्ठ लिपिक के इशारे पर हो रहा हो।

सरकारी सेवा नियमों के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी को निर्धारित समय पर कार्यालय में उपस्थित होना तथा बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के कार्यस्थल नहीं छोड़ना चाहिए। इसके बावजूद कनिष्ठ लिपिक के देर से आने और बिना सूचना लंबे समय तक अनुपस्थित रहने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इससे विभागीय कार्य प्रभावित होने के साथ-साथ कार्यालय आने वाले लोगों को भी अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

सूत्रों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। कनिष्ठ लिपिक की मनमानी लंबे समय से जारी है, लेकिन विभागीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न होने से उनके हौसले बुलंद हैं। यही कारण है कि मीडिया द्वारा मामला उजागर किए जाने के बाद भी उनकी कार्यशैली में कोई सुधार देखने को नहीं मिला।

अब बड़ा सवाल यह है कि जब एक कनिष्ठ लिपिक अपने मनमाने समय पर कार्यालय पहुंचे, बिना सूचना घंटों अनुपस्थित रहे और अधिकारी की गैरमौजूदगी में पूरे कार्यालय की व्यवस्था उसी के भरोसे संचालित होती दिखे, तो विभागीय अनुशासन और जवाबदेही की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

आमजन की मांग है कि मामले का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए उपस्थिति पंजिका, सीसीटीवी फुटेज एवं कार्यालय संचालन व्यवस्था की जांच कराई जाए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी कार्यालयों में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही कायम हो सके।

वही इस संबंध में आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी रंजीत कुमार से बात किया गया तो उनके द्वारा बताया गया कि हमारे संज्ञान में मामला नही था आपके माध्यम से जानकारी मिली है नोटिस जारी कर 3 दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। उचित जवाब न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।


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