ज्ञान भारती विद्यापीठ में शिक्षा के नाम पर धांधली

Spread the love

बिना प्रशिक्षित स्टाफ, बिना प्रधानाध्यापक, जूनियर स्कूल के नाम पर चल रहा प्राथमिक विद्यालय

अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकर नगर (भियांव), संवाददाता।
जनपद के खंड शिक्षा क्षेत्र भियांव अंतर्गत संचालित ज्ञान भारती विद्यापीठ जूं हाई स्कूल, मथुरा रसूलपुर में शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही उजागर हुई है। विद्यालय को केवल प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) की मान्यता प्राप्त है, लेकिन स्कूल का नाम और संचालन जूनियर हाईस्कूल (कक्षा 6 से 8) के रूप में किया जा रहा है।

जनसूचना में खुला बड़ा खुलासा

सूचना के अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में यह सामने आया है कि विद्यालय में कोई प्रधानाध्यापक नियुक्त नहीं है।
सिर्फ एक सहायक अध्यापक के बल पर स्कूल का संचालन हो रहा है। न कोई चपरासी, न लिपिक और न ही अन्य सहायक स्टाफ विद्यालय में तैनात है।विद्यालय का माध्यम हिंदी है, जबकि मांगी गई सूचना इंग्लिश मीडियम ‘जी.बी.वी.पी एकेडमी’ की थी। इससे स्पष्ट होता है कि स्कूल का नाम बदलकर भ्रम फैलाया जा रहा है, और फर्जी तरीके से संचालन किया जा रहा है।

पोस्टरों पर प्रधानाध्यापक, हकीकत में गायब

विद्यालय की दीवारों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर चिपकाए गए पोस्टरों में प्रधानाध्यापक का नाम दर्ज है, जबकि जनसूचना के आधार पर विद्यालय में कोई प्रधानाध्यापक तैनात नहीं है। यह अपने आप में बड़ा सवाल है कि बगैर प्रधानाध्यापक के विद्यालय में प्रशासनिक कार्य कैसे संचालित हो रहे हैं?

इंटर कॉलेज का बोर्ड, 10 साल से कम उम्र के छात्र

विद्यालय भवन पर लगा बोर्ड “पं. कमला प्रसाद त्रिपाठी स्मारक इंटर कॉलेज” का है, जबकि विद्यालय में 15 से 20 बच्चे ही उपस्थित हैं, जिनकी उम्र 10 साल से भी कम है।
ऐसे में सवाल उठता है कि इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की न्यूनतम उम्र 14–15 वर्ष होनी चाहिए, तो फिर यह किस स्तर का विद्यालय है? यह दर्शाता है कि विद्यालय में मान्यता और संचालन स्तर को लेकर गंभीर गड़बड़ी है, और हो सकता है कि सरकारी अनुदान या अन्य लाभों के लिए स्कूल की जानकारी में हेरफेर की जा रही हो।

खंड शिक्षा अधिकारी की भूमिका संदिग्ध

जनसूचना में जो जानकारी उपलब्ध कराई गई है, वह खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) भियांव के दस्तावेजों पर आधारित है।
यदि इतने बड़े स्तर पर अनियमितता हो रही है, तो या तो बीईओ की जानकारी में यह सब है, या फिर उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं — दोनों ही स्थिति में सवाल खड़े होते हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की चुप्पी और निरीक्षण प्रणाली की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। जब प्रदेश सरकार 50 से कम छात्र संख्या वाले सरकारी विद्यालयों को बंद करने की योजना बना रही है, तो फिर ऐसे निजी स्कूल, जो नियमों को ताक पर रखकर चल रहे हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को इस प्रकरण का गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए।
यदि जांच में अनियमितता सिद्ध होती है, तो संबंधित विद्यालय की मान्यता निरस्त कर उचित विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ न हो और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बना रहे।


Spread the love

Related Posts

धान खरीद घोटाले में एफआईआर के बाद सचिव की और मुश्किले बढ़ी, धारा में बढ़ोत्तरी

Spread the love

Spread the loveअम्बेडकरनगर। धान क्रय केंद्र में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में दर्ज एफआईआर में अब गंभीर धाराएं भी जोड़ दी गई हैं। खबर प्रकाशित होने के बाद…


Spread the love

प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रोहित मिश्रा के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब, के.पी बाबा ने गर्मजोशी से किया अभिनंदन

Spread the love

Spread the loveअवधी खबर संवाददाता सुल्तानपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ रोहित मिश्रा के पश्चिम क्षेत्र आगमन पर नोएडा में आयोजित स्वागत कार्यक्रम में सुल्तानपुर जनपद के…


Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *