ग्राम पंचायत सचिव पूजा चौरसिया पर महा मिट्टी घोटाले का आरोप, जांच की मांग

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अवधी खबर संवाददाता
बसखारी अंबेडकरनगर। विकासखंड बसखारी के ग्राम सभा देवहट में कथित तौर पर लाखों रुपये का मिट्टी पटाई घोटाला सामने आया है, जिसमें ग्राम पंचायत सचिव पूजा चौरसिया और ग्राम प्रधान के बीच गड़बड़ी की संभावना जताई जा रही है। इस घोटाले का खुलासा हाल ही में ग्रामीणों और स्थानीय विद्यालय के शिक्षकों द्वारा किया गया, जिन्होंने दावा किया कि मिट्टी पटाई के नाम पर भारी वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं।

विवादित मिट्टी पटाई कार्य:

इं ग्राम स्वराज के अनुसार, उच्च प्राथमिक विद्यालय देवहट और अंबेडकर पार्क में मिट्टी पटाई के कार्यों में 2,50,000 रुपए से ज्यादा का खर्च दिखाया गया है, जबकि वास्तविक में इन कार्यों के लिए उपयोग की गई मिट्टी की कीमत बहुत कम थी। उच्च प्राथमिक विद्यालय देवहट के नाम पर 20 मई 2025 और 22 मई 2025 को 95,830 रुपए और 97,761रुपए दो बार मिट्टी पटाई का कार्य दिखाया गया।विद्यालय के शिक्षक बताते हैं कि कुल 30 से 35 ट्राली मिट्टी का ही काम किया गया था, जिसमें प्रति ट्राली की वास्तविक लागत दो सौ रुपए थी, जबकि जो राशि निकली गई, वह कहीं अधिक थी। यह पाया गया कि कार्य की वास्तविक लागत 7,000 रूपये थी, लेकिन अधिकारियों ने 1,93,591 रुपए का भुगतान किया, जिससे 1,86,591रुपए का घोटाला हुआ।

अंबेडकर पार्क में 56,724 रुपए की मिट्टी पटाई दिखायी गई।यहां भी ग्रामीणों के अनुसार, केवल 15 से 20 ट्राली मिट्टी ही डाली गई थी, जिसकी वास्तविक कीमत 4,000 रूपये के आसपास थी। इस प्रकार, 52,724 रूपये का गबन हुआ है।

ग्राम पंचायत सचिव पूजा चौरसिया पर गंभीर आरोप

ग्राम पंचायत सचिव पूजा चौरसिया पर आरोप है कि उन्होंने ग्राम पंचायत के धन का दुरुपयोग करते हुए, स्कूल और पार्क में मिट्टी पटाई के कार्यों को फर्जी तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। कई ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई घटना नहीं है, क्योंकि इससे पहले भी पूजा चौरसिया पर उनके कार्यकाल में कई भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं।

ग्राम प्रधान की भी भूमिका संदिग्ध

ग्राम प्रधान ने एक टाली मिट्टी की कीमत 5,000 रूपये बतायी है, जबकि विद्यालय के गुरुजी के अनुसार, 200 रूपये प्रति ट्राली की दर से काम हुआ था। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि धन की भारी हेराफेरी की गई है।
ग्रामीणों और विद्यालय के कर्मचारियों ने इस घोटाले की जांच की मांग की है और अधिकारियों से अपील की है कि तत्काल इस मामले की गहन जांच की जाए। उनका कहना है कि इस घोटाले से गांव के विकास कार्यों को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा है और आम जनता का पैसा हड़प लिया गया है।

क्या कहती है पंचायत सचिव?

ग्राम पंचायत सचिव पूजा चौरसिया ने इस आरोप पर फिलहाल कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि कार्यों की प्रगति और भुगतान की प्रक्रिया सभी मानकों के तहत की गई थी।

सम्भावित घोटाले की जांच जरूरी:

अब सवाल यह उठता है कि क्या यह केवल एक गलती थी या फिर एक संगठित घोटाले का हिस्सा था। इसके लिए जिला प्रशासन और लोकायुक्त से मामले की स्वतंत्र जांच की अपील की जा रही है। सूचना का अधिकार के तहत सभी भुगतान और कार्यों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए।
लोकायुक्त या सीडीओ से मांग की जा रही है कि इस मामले की गहन जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। समाजसेवियों और ग्रामीणों ने भी शासन से ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके और जनता का धन सही तरीके से इस्तेमाल हो।


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