अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर।
जनपद में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ताजा मामला विकासखंड बसखारी की ग्राम सभा सलेमपुर परसवा से जुड़ा है, जहां खंडजा मरम्मत कार्य में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सभा में चल रहे खंडजा मरम्मत कार्य के लिए तीन अलग-अलग मास्टर रोल जारी किए गए हैं। इन तीनों मास्टर रोल में कुल मिलाकर 23 श्रमिकों के कार्य करने का विवरण दर्शाया गया है। जबकि मनरेगा के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार एक श्रमिक एक समय में केवल एक ही मास्टर रोल पर कार्य कर सकता है।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि तीनों मास्टर रोल में भले ही श्रमिकों के नाम अलग-अलग दर्शाए गए हों, लेकिन हाजिरी के लिए अपलोड की गई तस्वीरें एक ही व्यक्ति की हैं, जिन्हें घुमा-फिराकर तीनों मास्टर रोल में प्रयोग किया गया है। यह स्पष्ट रूप से डिजिटल हाजिरी प्रणाली के दुरुपयोग और फर्जी श्रमिक दिखाकर भुगतान निकालने की ओर इशारा करता है।
बताया जा रहा है कि यदि कोई आम नागरिक मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर मास्टर रोल और फोटो का मिलान करे, तो यह फर्जीवाड़ा आसानी से सामने आ सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आम आदमी इस गड़बड़ी को पकड़ सकता है, तो संबंधित अधिकारी इसे क्यों नहीं देख पा रहे हैं? या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं।
इस पूरे मामले में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, मनरेगा टेक्नीशियन, एपीओ मनरेगा सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है। आशंका जताई जा रही है कि सभी की मिलीभगत से मनरेगा की धनराशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी अम्बेडकरनगर से इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा फर्जी भुगतान की गई धनराशि की रिकवरी सुनिश्चित करने की मांग की है।
मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने शासन की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस खुलासे पर क्या कार्रवाई करता है।





