कजपुरा के भूमाफिया मिट्ठूलाल पर कूटरचित दस्तावेजों से KCC हासिल करने का आरोप, बैंक व राजस्व कर्मियों की मिलीभगत की आशंका
अंबेडकरनगर । जनपद के कजपुरा ग्राम पंचायत से जुड़े एक गंभीर मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा हजपुरा शाखा पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जारी करने में भारी अनियमितता और धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। आरोप है कि खसरे में दर्ज रास्ता, परती, बाग, शामिल जोत आबादी तथा पहले से निर्मित मकान वाली भूमि पर नियमों को दरकिनार कर केसीसी जारी कर दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक यही जानकारी थी कि किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ केवल कृषि योग्य भूमि पर ही दिया जाता है, जिसके लिए खतौनी व खसरा अनिवार्य होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि गैर-कृषि भूमि को कृषि भूमि दर्शाकर केसीसी कैसे जारी किया गया। आरोप है कि कजपुरा के भूमाफिया गिरोह से जुड़े मिट्ठूलाल पुत्र स्व. जगमोहन ने बैंक कर्मचारियों एवं राजस्व विभाग के कुछ कर्मियों की कथित मिलीभगत से कूटरचित व फर्जी प्रपत्र तैयार कर बैंक ऑफ बड़ौदा हजपुरा शाखा में प्रस्तुत किए।
दिनांक 23 जुलाई 2021 को इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर केसीसी जारी कराया गया। जानकारी के अनुसार मिट्ठूलाल द्वारा बंधक रखे गए गाटा संख्या 301, 307, 504, 572, 578 एवं 456क हैं, जिनमें से केवल गाटा संख्या 301 ही कृषि योग्य है और खसरे में कृषि भूमि के रूप में दर्ज है। जबकि गाटा संख्या 307 एवं 572 पर पहले से मकान निर्मित है, और गाटा संख्या 456क का वास्तविक अस्तित्व व स्थिति संदिग्ध बताई जा रही है।
इतना ही नहीं, आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में मिट्ठूलाल का पुत्र सनोज गवाह बना, जबकि उन्हें भली-भांति ज्ञात था कि रास्ता व परती भूमि पर किसान क्रेडिट कार्ड जारी नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद पिता-पुत्र ने एकराय होकर बैंक से लाभ उठाया।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब यह आशंका जताई गई कि एक ही गाटा के दो अलग-अलग खसरे जारी किए गए हैं, जो बिना राजस्व कर्मियों के संरक्षण के संभव नहीं है।
अब बड़ा सवाल यह है कि बैंक ऑफ बड़ौदा हजपुरा के शाखा प्रबंधक, क्षेत्रीय लेखपाल और कृषि विभाग इस मामले में दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे या फिर पूरे प्रकरण को संरक्षण दिया जाएगा।





