मोहनलालगंज में रियल एस्टेट सौदे में फर्जीवाड़े का आरोप, वर्षों बाद दर्ज हुआ मुकदमा…..
मोहनलालगंज।लखनऊ,मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में जमीन खरीद फरोख्त से जुड़े एक बड़े मामले में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि जमीन विक्रेताओं ने एक रियल एस्टेट कंपनी से दो करोड़ बीस लाख रुपये लेने के बावजूद न तो तय क्षेत्रफल की जमीन दी और न ही बैनामा किया।
हैरानी की बात यह रही कि पीड़ित द्वारा बार-बार शिकायत के बावजूद पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से टालमटोल की, जिसके बाद पीड़ित को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। अंततः न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया।प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित हंसराज रावत की कंपनी मोहनलालगंज के गौरा व पदमिन खेड़ा में आवासीय योजना विकसित करने का कार्य करती है। इसी क्रम में वर्ष 2018 में कंपनी ने खसरा संख्या 1551 एवं 1548 की कुल 29,967 वर्गफीट जमीन को ₹1000 प्रति वर्गफीट की दर से खरीदने का करार किया था।
आरोप है कि विक्रेताओं अशोक कुमार सिंह पुत्र स्व. जी.डी. सिंह एवं अशोक कुमार सिंह पुत्र बट्टी सिंह ने जमीन का कुल क्षेत्रफल 32,500 वर्गफीट बताया था। फिर किस्तों में हुआ दो करोड़ बीस लाख रुपए का भुगतान कंपनी द्वारा 29 जनवरी 2018 से 15 जुलाई 2019 के बीच बैंक ट्रांसफर व नकद के माध्यम से भुगतान किया गया। भुगतान से संबंधित बैंक एंट्री, चेक नंबर और नकद रसीदें भी उपलब्ध कराई गईं।
इसके बावजूद विक्रेताओं ने विक्रय विलेख निष्पादित नहीं किया।बाद में विक्रेताओं द्वारा स्वयं धारा 24 राजस्व संहिता के अंतर्गत सीमांकन वाद दायर किया गया। न्यायालय के आदेश बीते 25 जुलाई 2019 में यह स्पष्ट हुआ कि गाटा संख्या 1551 का क्षेत्रफल कम है, जबकि अन्य गाटा का क्षेत्रफल अभिलेखों से अधिक पाया गया। इसके बाद भी कंपनी के पक्ष में बैनामा नहीं किया गया।
पीड़ित हंसराज रावत का आरोप है कि जब इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की गई तो पुलिस ने इसे आपसी लेन-देन का मामला बताकर एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर दिया। कई बार थाने के चक्कर लगाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।मोहनलालगंज पुलिस की निष्क्रियता से परेशान होकर पीड़ित ने अंततः न्यायालय का सहारा लिया। न्यायालय द्वारा मामले में आदेश पारित किए जाने के बाद संबंधित मोहनलालगंज थाने में पुलिस ने मजबूरन मुकदमा दर्ज किया।
इसी दौरान पीड़ित को जानकारी मिली कि विवादित जमीन को चोरी-छिपे किसी अन्य के नाम रजिस्ट्री कर दिया गया, जिससे पूरे प्रकरण में धोखाधड़ी की पुष्टि हुई है।मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यह पूरा मामला सुनियोजित ठगी, कूटरचना और विश्वासघात का है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।