अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। जिले के
विकासखंड रामनगर अंतर्गत भीटी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एपीओ एवं ग्राम सचिव सतीश यादव के संरक्षण में मास्टर रोल में खुली हेराफेरी कर फर्जी भुगतान निकाला जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, एक ही पुरुष और एक ही महिला मजदूर का नाम आगे-पीछे कर अलग-अलग प्रविष्टियों में दर्ज किया जाता है। आरोप है कि जहां वास्तविक रूप से मात्र 10 मजदूर कार्य करते हैं, वहीं कागज़ों में उन्हें 40 मजदूर दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। इससे वास्तविक गरीब मजदूरों को न तो पूरा रोजगार मिल पा रहा है और न ही उनकी मजदूरी का सही भुगतान हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मामले को लेकर पूर्व में कई बार शिकायतें की गईं और खबरें भी प्रकाशित हुईं, लेकिन अब तक न तो किसी प्रकार की जांच कराई गई और न ही जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई हुई। इससे ब्लॉक स्तर पर मिलीभगत और भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलने की आशंका और गहरी हो गई है।
एक ओर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पारदर्शिता के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर रामनगर ब्लॉक में मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को लूट का जरिया बनाए जाने के आरोप शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें है की मनरेगा कार्यों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो। वास्तविक मजदूरों को लंबित मजदूरी का शीघ्र भुगतान कराया जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गरीब मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करते हुए इस गंभीर मामले में जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि मनरेगा योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके।