अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर।
जनपद में ग्राम सभाओं में भ्रष्टाचार के मामले अब आरोपों से आगे बढ़कर सरकारी दस्तावेज़ों में दर्ज साक्ष्यों के रूप में सामने आ रहे हैं। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड किए गए बिल-वाउचर अब खुद ही अनियमितताओं की कहानी बयां कर रहे हैं। विकासखंड जलालपुर की ग्राम सभा महेशपुर नेमपुर का मामला ऐसा ही एक उदाहरण बनकर उभरा है, जहां फर्जी और अपूर्ण बिलों का सिलसिला सामने आया है।
अब तक संदिग्ध भुगतानों को मीडिया में अंधा बिल,भूतिया बिल और आसमानी बिल जैसे नाम दिए जाते रहे हैं, लेकिन महेशपुर नेमपुर में सामने आए प्रकरण इन सभी से एक कदम आगे दिखाई देते हैं। यहां बिना तारीख, बिना फाइल और बिना कार्य विवरण के भी भुगतान दर्ज हैं। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत सचिव अशोक यादव के कार्यकाल में कई ऐसे बिल पास किए गए हैं, जिनका सरकारी नियमों से कोई सामंजस्य नहीं बैठता।
पोर्टल पर दर्ज प्रमुख संदिग्ध भुगतानों में जून 2025 में ₹19,560 का बिल बिना दिनांक के, मई 2025 में ₹18,000 व ₹6,415 के बिल जिनके सामने फाइल डज़ नॉट एग्ज़िस्ट दर्ज है, मई 2028 में ₹19,980 का भुगतान बिना फाइल के, तथा मई 2025 में ₹42,161 व ₹40,638 के ऐसे बिल शामिल हैं जिनमें न कार्य का नाम है, न सामग्री का विवरण और न ही तिथि।
सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी भुगतान में कार्य, स्थल, सामग्री, मात्रा और दर का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य है, लेकिन महेशपुर नेमपुर के अधिकतर बिलों में ये सभी जानकारियां गायब हैं। इससे भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि खंड विकास अधिकारी जलालपुर की ओर से संबंधित पंचायत सचिव पर विशेष कृपा बनी हुई है, जिस कारण अब तक न तो जांच आगे बढ़ी है और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है। यदि ऐसा नहीं है, तो फिर इतने स्पष्ट दस्तावेजी साक्ष्यों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई यह प्रश्न प्रशासन के सामने है।
जनहित में मांग उठ रही है कि ग्राम सभा महेशपुर नेमपुर के समस्त बिल-वाउचर की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों से राशि की वसूली हो और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस खुले दस्तावेजी भ्रष्टाचार पर क्या कदम उठाता है।





