बिना लाइसेंस नवीनीकरण के संचालित सरस्वती हॉस्पिटल पर घमासान, सीएचसी अधीक्षक व सीएमओ की भूमिका पर सवाल

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अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर(प्रमोद वर्मा)। जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीटी अंतर्गत नगहरा स्थित सरस्वती हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर के बिना लाइसेंस नवीनीकरण संचालित होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आदेश और जमीनी हकीकत में अंतर सामने आने के बाद सीएचसी अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।


जानकारी के अनुसार उक्त अस्पताल का 100 बेड का पंजीकरण 29 जून 2024 को किया गया था, जिसकी वैधता 29 जून 2025 तक थी। वैधता समाप्त होने के बाद अस्पताल का नवीनीकरण नहीं कराया गया। इसके बावजूद अस्पताल का संचालन जारी रहने की बात सामने आई है, जो क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट 2010 का उल्लंघन है। मामले को संज्ञान में लेते हुए सीएमओ ने सीएचसी अधीक्षक को पत्र जारी कर स्पष्ट जानकारी मांगी थी। पत्र में उल्लेख किया गया था कि अस्पताल का नवीनीकरण नहीं हुआ है, फिर भी यदि 100 बेड का संचालन किया जा रहा है तो तत्काल प्रभाव से अस्पताल को सील कर कार्रवाई से अवगत कराया जाए।


इस संबंध में जब सीएचसी अधीक्षक भीटी से वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि जांच के समय अस्पताल बंद पाया गया था और इस संबंध में अपनी आख्या रिपोर्ट सीएमओ को भेज दी गई है। उनका कहना है कि निरीक्षण के दौरान संचालन नहीं हो रहा था।
हालांकि, मीडिया की पड़ताल में अस्पताल सामान्य रूप से संचालित पाया गया, जहां मरीजों का उपचार जारी था। इससे विभागीय निरीक्षण और वास्तविक स्थिति के बीच विरोधाभास उजागर हुआ है।


अब प्रश्न यह उठता है कि यदि जांच के समय अस्पताल बंद था तो उसके बाद संचालन कैसे शुरू हो गया? क्या दोबारा निरीक्षण हुआ? यदि अस्पताल वास्तव में संचालित हो रहा है तो सीलिंग की कार्रवाई क्यों नहीं की गई? सीएमओ का “शायद अस्पताल सील हो गया है” जैसा बयान और दूसरी ओर सीएचसी अधीक्षक की रिपोर्ट, जबकि मौके पर अस्पताल चालू मिलना इन सभी तथ्यों ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। इससे यह भी सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या कार्रवाई केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित है? जनता के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर प्रकरण में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में ठोस कदम उठाता है या यह मामला भी अन्य प्रकरणों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।


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