शव ले जाने के लिए मेडिकल कॉलेज में जारी नंबर पर फोन करने के बाद पहुंच रहे प्राइवेट एंबुलेंस,धन उगाही का बना जरिया

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मेडिकल कॉलेज में शव ले जाने के लिए दो सरकारी एम्बुलेंस है तैनात, आखिर कैसे मिलेगा आम जनता को सरकारी सुविधा का लाभ, क्या यही है रामराज्य

अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)।
जनपद के राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज सदरपुर में मरीजो की मौत के बाद शव को घर पहुंचाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इस मामले का उजागर तब हुआ जब मृत्यु हो जाने के बाद परिजन ने सरकारी एंबुलेंस की सेवा लेने के बाद भी प्राइवेट एंबुलेंस कर्मी पहुंचा तो उसने इसका विरोध किया तो पूरा मामला सामने निकल कर आया। परिजनों का कहना है कि सरकारी एंबुलेंस सेवा के लिए जारी आधिकारिक नंबर पर संपर्क करने के बावजूद उन्हें प्राइवेट एंबुलेंस के माध्यम से शव को घर (कटेहरी) ले जाने के लिए भुगतान करने के लिए 1500 रुपए की मांग की गई।

मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार दोपहर एक गंभीर मरीज की मृत्यु के बाद परिजनों ने सरकारी एंबुलेंस सेवा के नंबर पर फोन कर शव को गांव पहुंचाने की मांग की। कॉल रिसीव करने वाले ने एंबुलेंस भेजने का आश्वासन दिया। लेकिन करीब 15-20 मिनट के भीतर अस्पताल परिसर में एक प्राइवेट एंबुलेंस पहुंची और उसके कर्मी ने शव ले जाने के लिए दूरी के आधार पर 1500 रुपए की मांग की।


परिजनों ने जब सरकारी सेवा के बारे में सवाल उठाया तो उन्हें बताया गया कि सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है, यह प्राइवेट सेवा है।” दूरी लगभग 40-50 किलोमीटर बताकर तय किराया मांगा गया। इस स्थिति से परिजन हैरान रह गए, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट रूप से सरकारी एंबुलेंस सेवा की मांग की थी।

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह कोई एकल मामला नहीं है। आरोप है कि शव वाहन चालक सरकारी हेल्पलाइन पर कॉल रिसीव करने के बाद प्राइवेट एंबुलेंस संचालकों को सूचना दे देते हैं और दूरी के आधार पर वसूली की जाती है। 20-30 किलोमीटर के लिए 800 से 1000 रुपये और 50 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर 1500 रुपये या उससे ज्यादा वसूले जाने की बात सामने आ रही है।

इतना ही नहीं बताया जा रहा है कि सरकारी शव वाहन चालक बाबूराम व चौहान के द्वारा मेडिकल कॉलेज में प्राइवेट एम्बुलेंस चलवाई जाती है शव ले जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध न होने का हवाला दिया जाता है साथ ही फोन करने पर दोनों के द्वारा एक दूसरे पर हीला हवाली किया जाता है।, बाद में सरकारी एंबुलेंस के बजाए अपने ही कर्मचारियों को भेज कर प्राइवेट एंबुलेंस से शव पहुंचने के नाम पर पैसा वसूला जाता है।


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