डीएम और सीएमओ के निर्देशों के बावजूद अवैध अस्पताल संचालित?

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बरियावन-टांडा रोड पर ‘यशवंत हड्डी अस्पताल’ का चौंकाने वाला खुलासा

अवधी खबर संवाददाता

अम्बेडकर नगर। जनपद में एक ओर जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के निर्देश पर अवैध अस्पतालों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर तहसील अकबरपुर क्षेत्र में बिना पंजीकरण एक तथाकथित अस्पताल के संचालन का मामला सामने आया है। मामला बरियावन-टांडा रोड पर बरियावन से लगभग एक किलोमीटर उत्तर स्थित ‘यशवंत हड्डी अस्पताल’ से जुड़ा है।

अस्पताल के बाहर लगे बोर्ड पर टूटी-फूटी हड्डी जोड़ने, प्लास्टर, सभी प्रकार के ऑपरेशन ‘दूरबीन मशीन’ से करने, एक्स-रे, ऑक्सीजन, पैथोलॉजी, नेबुलाइजर व ऑक्सीमीटर जैसी सुविधाओं का दावा किया गया है। लेकिन जब मीडिया टीम ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

केंद्र संचालक ने स्वयं स्वीकार किया कि अस्पताल का अभी तक कोई विधिक पंजीकरण नहीं है। उनका कहना था कि पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया है और जल्द ही नंबर प्राप्त हो जाएगा। हालांकि बातचीत के दौरान यह भी सामने आया कि जो आवेदन किया गया है, वह अस्पताल के बजाय मेडिकल स्टोर के पंजीकरण से संबंधित है।

संचालक ने यह भी कहा कि वर्तमान में अस्पताल में कोई विशेष व्यवस्था नहीं है और प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से बोर्ड लगाया गया है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बोर्ड पर दी गई सुविधाओं के अनुसार अस्पताल अवैध की श्रेणी में आता है।

मौके पर जहां संचालक बैठते हैं, वहां किसी बड़े चिकित्सा केंद्र जैसी व्यवस्था दिखाई नहीं दी। किंतु बाजार में की गई जानकारी के अनुसार बताया गया कि वास्तविक संचालन बेसमेंट में किया जाता है और वहां आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं। यदि यह तथ्य सही है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि मरीजों की जान से भी खिलवाड़ माना जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार बिना पंजीकरण, बिना मान्यता प्राप्त डिग्री एवं आवश्यक मानकों के बिना किसी भी प्रकार का अस्पताल या सर्जिकल सुविधा संचालित करना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद खुलेआम ऐसे केंद्र का संचालन कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी के नेतृत्व में पूर्व में भी कई अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग कितनी तत्परता दिखाता है।

एक ओर प्रशासन अवैध चिकित्सीय संस्थानों पर सख्ती का दावा कर रहा है, तो दूसरी ओर बिना पंजीकरण और बिना स्पष्ट वैधता के अस्पताल का संचालन प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर रहा है। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।


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