अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर (प्रमोद वर्मा)। जनपद के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी कार्यालय में सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। कार्यालय में तैनात कर्मचारियों की मनमानी इस कदर हावी है कि आने-जाने के कोई निश्चित नियम ही नहीं रह गए हैं। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
ताजा मामला उस समय प्रकाश में आया जब मीडिया ने पड़ताल किया कार्यालय में तैनात बड़े बाबू प्रदीप कुमार मिश्रा करीब दोपहर 12 बजे से 2 बजकर 20 मिनट तक करीब दो घंटे बीस मिनट से अधिक समय तक अपने कार्यस्थल से गायब रहे। जिसकी सही हकीकत आफिस के कार्यालय में लगा सीसीटीवी कैमरे से जाना जा सकता है कि कितने देर से आफिस से गायब थे।
सरकारी नियमावली के अनुसार, कोई भी कर्मचारी बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के अपना कार्यस्थल नहीं छोड़ सकता, लेकिन यहां तो बिना किसी लिखित सूचना या अवकाश आवेदन के ही दफ्तर छोड़ दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि कार्यालय के मुखिया, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डीओ रंजीत कुमार तक को बड़े बाबू के इस तरह कार्यालय से गायब रहने की कोई जानकारी नहीं थी। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक नियंत्रण के अभाव और अनुशासनहीनता को दर्शाता है।
मीडिया की पड़ताल के दौरान जब कार्यालय के अन्य कर्मचारियों से इस बारे में पूछा गया, तो वे बड़े बाबू की कार्यशैली पर पर्दा डालते नजर आए। कर्मचारियों ने तर्क दिया कि ‘पत्नी की तबीयत खराब होने के कारण वे डॉक्टर के पास गए हैं।’ हालांकि, सवाल यह है कि यदि यह आपात स्थिति थी, तो भी लिखित सूचना क्यों नहीं दी गई?
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि बड़े बाबू का समय से कार्यालय न पहुंचना और बिना बताए घंटों गायब रहना एक सामान्य बात बन चुकी है। कार्यालय में व्याप्त इस मनमानी से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सवाल यह उठता है कि क्या उच्चाधिकारी इस अनुशासनहीनता पर कोई ठोस कार्रवाई करेंगे या फिर इसी तरह फाइलों पर धूल जमती रहेगी? जनता उम्मीद कर रही है कि संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेंगे और कार्यालय में अनुशासन बहाल करेंगे ताकि सरकारी तंत्र का काम सुचारू रूप से चल सके।




