गोंडी रीति-रिवाज और गोंड़ऊ बाजे की धुन के बीच गोंड समाज ने मनाई जयंती, हक-अधिकारों के लिए एकजुट होने का आह्वान
अवधी खबर संवाददाता
चहोड़ाघाट (अंबेडकरनगर)। तहसील आलापुर के जहांगीरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत उमरी जलाल (हर्दिहां) में गोंड वंश की आन-बान-शान और अदम्य साहस की प्रतीक वीरांगना महारानी दुर्गावती की जयंती श्रद्धा, उल्लास और गौरवपूर्ण वातावरण में मनाई गई।
कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे गोंड-धुरिया सगा-समाज के लोगों ने महारानी दुर्गावती की प्रतिमा के समक्ष पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। गोंडी रीति-रिवाज और पारंपरिक गोंड़ऊ बाजे की धुन के बीच महारानी के शौर्य और त्याग का जयघोष किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने समाज की एकजुटता और वीरांगना के प्रति श्रद्धा को प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सगा-समाज सचेतक एवं पत्रकार सुनील कुमार गोंड ने महारानी दुर्गावती के त्याग, शौर्य, स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि महारानी दुर्गावती का जीवन साहस, स्वाभिमान और राष्ट्ररक्षा के लिए समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों और सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देता रहेगा।
वरिष्ठ समाज सचेतक भेजूराम गोंड ने कहा कि महापुरुषों और वीरांगनाओं की जयंती मनाने का उद्देश्य केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके आदर्शों को आत्मसात कर समाज के विकास, शिक्षा, जागरूकता और अधिकारों के लिए संगठित प्रयास करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने समाज के लोगों से आपसी एकजुटता बनाए रखने और सामाजिक मुद्दों को सामूहिक रूप से उठाने का आह्वान किया।
पूर्व प्रधानाध्यापक राममिलन गोंड ने महारानी दुर्गावती के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन संघर्ष, स्वाभिमान और वीरता की अनुपम पाठशाला है। उन्होंने कहा कि समाज की युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना जरूरी है, ताकि उनमें आत्मसम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो सके।
इस अवसर पर डा. लक्ष्मीकांत गोंड, विजय कुमार गोंड और डा. अनिल गोंड ने भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने गोंड-धुरिया सगा-समाज के लोगों से अपने हक-अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित होने की अपील की। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए जागरूकता के साथ संगठन और आपसी सहयोग जरूरी है। शिक्षा को सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान आगामी 9 अक्टूबर 2026 को जिला मुख्यालय स्थित कटरिया याकूबपुर बाग में आयोजित होने वाले गोंड-धुरिया सगा-समाज के हक-अधिकार सम्मेलन की जानकारी भी दी गई। वक्ताओं ने समाज के अधिक से अधिक लोगों से सम्मेलन में पहुंचकर सहभागिता करने और सामाजिक मुद्दों पर अपनी एकजुटता प्रदर्शित करने की अपील की।
समारोह में पारंपरिक वेशभूषा, गोंडी संस्कृति और गोंड़ऊ बाजे की धुन विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पूरे कार्यक्रम में महारानी दुर्गावती के शौर्य और बलिदान को याद करते हुए सामाजिक एकता, जागरूकता और अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने का संदेश दिया गया। अंत में समाज के लोगों ने महारानी दुर्गावती के आदर्शों को आत्मसात करते हुए समाज की एकता और अधिकारों के लिए संगठित होकर कार्य करने का संकल्प लिया।




