अवधी खबर संवाददाता
अंबेडकरनगर।
स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में चल रहा अवैध कारोबार अंबेडकरनगर के सम्मनपुर क्षेत्र में गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। यहां बिना पंजीकरण के क्लीनिक और नर्सिंग होम धड़ल्ले से चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी और मिलीभगत के कारण यह गोरखधंधा दिनोंदिन गहराता जा रहा है।
निजी आवास बना ‘गर्भपात केंद्र’, एएनएम सुशीला पर गंभीर आरोप
क्षेत्र में सरकारी एएनएम (सहायक नर्स दाई) के पद पर नियुक्त सुशीला नाम की स्वास्थ्यकर्मी पर आरोप है कि वह सरकारी एएनएम सेंटर पर कभी नहीं बैठती और ग्रामीण महिलाओं को इलाज व प्रसव के लिए अपने निजी आवास पर बुलाती है। वहीं पर वह अवैध रूप से प्रसव कराने के साथ-साथ गर्भपात भी कराती है, ऐसा आरोप स्थानीय ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया। सरकार से हर माह मोटी तनख्वाह लेने वाली यह एएनएम न तो सेंटर पर उपलब्ध रहती है, न ही निर्धारित समय पर किसी सरकारी सेवा का पालन करती है। उल्टे अपने निजी आवास को निजी नर्सिंग होम में तब्दील कर मोटी कमाई का जरिया बना चुकी है।
अधिकारियों की चुप्पी – संरक्षण या साझेदारी?
ग्रामीणों का आरोप है कि सुशीला खुद खुलेआम यह कहती है कि उसके ऊपर किसी अधिकारी का हाथ है, इसलिए कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। लोगों को शक है कि विभागीय अधिकारियों को इस अवैध धंधे से हिस्सा पहुँचता है, इसीलिए जांच और कार्रवाई की बात केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहती है।
सीएचसी अधीक्षक जयप्रकाश यादव की पुष्टि और प्रतिक्रिया
मुख्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के अधीक्षक डॉ. जयप्रकाश यादव ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि हमें जानकारी है कि वह अपने निजी आवास पर प्रसव कराती हैं, लेकिन गर्भपात की सूचना अब तक नहीं मिली थी। अब शिकायत के आधार पर जांच कराई जाएगी और कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय जागरूकता की दरकार, लेकिन डर का माहौल हावी
ग्रामीणों में इस अवैध कार्य को लेकर गहरा असंतोष है, लेकिन प्रभावशाली पद और विभागीय सुरक्षा कवच के कारण कोई खुलकर शिकायत करने को तैयार नहीं। यही कारण है कि यह अवैध धंधा लंबे समय से बिना किसी रोक-टोक के फलता-फूलता रहा है।
सरकारी तंत्र की लापरवाही और अधिकारियों की मिलीभगत का यह ज्वलंत उदाहरण न केवल जन स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है, बल्कि यह स्त्री स्वास्थ्य और मानवाधिकार के लिए भी गंभीर संकट है।
यदि इस पर तत्काल और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में यह मामला कानूनी, नैतिक और सामाजिक त्रासदी का कारण बन सकता है। क्या स्वास्थ्य विभाग जागेगा? या फिर अवैध गर्भपात का यह काला कारोबार यूं ही चलता रहेगा यह सवाल अब जनता नहीं, प्रशासन से है!





