34 साल पुराने वेतन घोटाले में स्वास्थ्य विभाग ने भी धोया हाथ, शिक्षा विभाग ने की खानापूर्ति
अयोध्या।
रामबली इंटर कॉलेज, गोसाईगंज से जुड़ा एक बड़ा वेतन घोटाला अब सामने आया है, जिसमें सरोज कुमार दूबे नामक शिक्षक पर दो विभागों — स्वास्थ्य और शिक्षा — से एक साथ वेतन लेने का गंभीर आरोप है। शिकायतकर्ता कामता प्रसाद द्वारा जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायत (संख्या 60000250163825) में यह आरोप लगाया गया है कि श्री दूबे ने स्वास्थ्य विभाग से त्यागपत्र दिए बिना ही शिक्षा विभाग में कार्यभार ग्रहण कर लिया था।
शिकायत के साथ 1990 से 1992 तक की विभागीय चिट्ठियों को भी संलग्न किया गया है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि श्री दूबे ने कुष्ठ नियंत्रण इकाई बीकापुर से अवकाश लिया, किन्तु उनका त्यागपत्र स्वीकृत नहीं हुआ और वे उस समय अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे।
दूसरी ओर शिक्षा विभाग ने इस शिकायत की जांच करते हुए कहा कि चूंकि श्री दूबे ने त्यागपत्र भेजा था (स्वीकृत नहीं हुआ), और वेतन वापसी के लिए तैयार हैं, इसलिए कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की जाएगी। यही नहीं, विभाग ने “विषयगत शिकायत को पंजीकृत (निस्तारित)” कर देने की संस्तुति की।
जनता के सवाल:
क्या दोहरा वेतन लेना अपराध नहीं? क्या त्यागपत्र “भेजने” मात्र से सेवा समाप्त मानी जा सकती है? यदि शिक्षक दोषी नहीं, तो धन वापसी की बात क्यों हो रही है? क्या विभागीय संरक्षण के कारण दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो रही? जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने मांग की है कि इस मामले में स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। वरना इस तरह के मामलों से जनसुनवाई प्रणाली पर से आम जनता का भरोसा उठ जाएगा।





