संवाददाता अजय सिंह, भीटी (अंबेडकरनगर)।
भीटी तहसील क्षेत्र के रानीपुर मोहन गांव में एक दलित परिवार का टीन-टप्पर का मकान प्रशासन ने तालाब की जमीन बताते हुए ढहा दिया। कार्रवाई के बाद से पीड़ित परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर है। पीड़ित ने इस प्रकरण को अन्यायपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है।
ग्राम निवासी जगदीश पुत्र कलेशर अनुसूचित जाति का गरीब व्यक्ति है। उसके पिता को लगभग 40 वर्ष पूर्व इंदिरा आवास मिला था, जिसकी हालत अब जर्जर हो चुकी है। उसी आवास के सामने उसने टीन-टप्पर डालकर अपने बच्चों व परिजनों के साथ रहना शुरू किया था।
जगदीश का कहना है कि उसके पूर्वज भी इसी भूमि पर रहते आए हैं, लेकिन अचानक यह जमीन तालाब खाते में दर्ज दिखाकर 21 सितंबर को दिन में दो बजे प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची और पुलिस बल की मौजूदगी में उसका मकान गिरा दिया।
पीड़ित का आरोप है कि उक्त खाता नंबर में दर्जनों परिवार बसे हुए हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ उसी के खिलाफ की गई। उसने बताया कि उसके पिता को कभी चार बिस्वा पट्टे की जमीन मिली थी, जिसमें चार भाइयों के बीच बंटवारे में उसे मात्र एक बिस्वा जमीन मिली, जो गांव से दूर और रहने योग्य नहीं है।
अब उसके पास न तो जमीन है और न ही सिर छुपाने के लिए छत। परिवार में मां, चार महिलाएं और पांच बच्चे सहित कुल दस लोग खुले में रहने को विवश हैं।
जगदीश ने मुख्यमंत्री को भेजे प्रार्थना पत्र में मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और उसे रहने योग्य जमीन व आवास उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीणों में भी चर्चा है कि यदि दर्जनों परिवार तालाब खाते की जमीन पर बसे हैं तो फिर कार्रवाई सिर्फ एक परिवार पर ही क्यों हुई। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री को भेजी गई अपील पर प्रशासन कब सुनवाई करता है और बेघर परिवार को राहत कब तक मिल पाती है।





