पीड़ितों ने एसपी से की शिकायत, दोषी अधिकारी पर कार्रवाई की मांग
अवधी खबर संवाददाता
अंबेडकरनगर।
जिले के थाना जलालपुर क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस पर बिना जांच के निर्दोषों पर मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि 4 नवंबर 2025 की शाम करीब 7:30 बजे हुई एक मामूली विवाद की घटना के बाद थाना जलालपुर पुलिस ने नशे में धुत एक व्यक्ति की शिकायत पर 5 निर्दोष ग्रामीणों के खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कर ली।
प्रकरण मुकदमा संख्या 506/2025 से संबंधित है, जिसेमें प्रवीण कुमार पुत्र हीरालाल, उनकी पत्नी कंचन, तथा शाहिल, मोनिका और काजल को नामजद किया गया है।
पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक अंबेडकरनगर को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया कि मुकदमा दर्ज करने वाले थाना जलालपुर के अधिकारी ने शिकायतकर्ता की मनगढ़ंत कहानी पर बिना किसी साक्ष्य या घटनास्थल की जांच के सीधे एफआईआर दर्ज कर दी।
पीड़ितों के अनुसार, घटना के समय प्रवीण कुमार अपनी सैलून पर ग्राहकों को सेवा दे रहे थे, उनकी पत्नी घर पर थीं, जबकि शाहिल शाहपुर चौराहा स्थित लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रहा था। वहीं, मोनिका और काजल भी घर पर ही मौजूद थीं।
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतकर्ता का घर आरोपियों के घर से काफी दूर है और उनका आपस में कोई विवाद या संपर्क नहीं रहा है। फिर भी पुरानी रंजिश के चलते झूठे आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज करा दी गई।
पीड़ितों को मुकदमे की जानकारी चार दिन बाद उपनिरीक्षक गुलाम रसूल द्वारा दी गई, तब जाकर परिवार को पूरी घटना का पता चला।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि थाना जलालपुर के कुछ अधिकारी शिकायत मिलते ही बिना किसी साक्ष्य या गवाहों के बयान दर्ज किए एफआईआर करने में तत्पर रहते हैं, जिससे क्षेत्र में पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पीड़ित परिवार ने एसपी अंबेडकरनगर से मांग की है कि मुकदमे से उनके नाम हटाए जाएं और दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को विवश होंगे।
यह मामला एक बार फिर पुलिस सुधारों की हकीकत और बिना जांच मुकदमा दर्ज करने की प्रवृत्ति को उजागर करता है। अब देखना यह है कि एसपी महोदय इस गंभीर प्रकरण पर क्या कदम उठाते हैं।
