अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र पाती के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रामजीत के निर्देश पर वैज्ञानिकों की टीम ने प्रक्षेत्र भ्रमण किया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि वर्तमान में कोहरा व पाले के कारण फसलों की वृद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि कोहरा और पाले से फसलों को बचाने के लिए हल्की सिंचाई के साथ जिंक आधारित पोषक तत्वों का छिड़काव आवश्यक है।
पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि फसलों में पाले से बचाव हेतु जिंक-मैंगनीज कार्बोमेट (मैंकोजेब) 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए। यह उपाय विशेष रूप से आलू, सरसों, मिर्च, बैगन और टमाटर जैसी फसलों में काफी प्रभावी है।
उन्होंने यह भी बताया कि रासायनिक दवाओं का छिड़काव ओस समाप्त होने के बाद ही करें, ताकि दवा पत्तियों द्वारा सही ढंग से अवशोषित हो सके। साथ ही छिड़काव के दौरान हवा का विशेष ध्यान रखें, जिससे दवा का घोल प्रयोगकर्ता के शरीर पर न गिरे।
गेहूं की फसल में सिंचाई के बाद ओट आने पर खरपतवार नियंत्रण के लिए सल्फोसल्फ्यूरान 13 ग्राम प्रति एकड़ (प्रति पाउच) की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई। इससे गेहूं का मामा, जई जैसे संकरी पत्ती वाले खरपतवार नष्ट होते हैं।
इसके अलावा क्लोदिनाफॉप 160 ग्राम प्रति एकड़ का छिड़काव भी लाभकारी बताया गया। चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार जैसे बथुआ, कृष्णनील, मकोय व जंगली पालक के नियंत्रण हेतु मेटसल्फ्यूरान 8 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सिफारिश की गई।
वैज्ञानिकों ने बताया कि दलहनी फसलों में भी पाले से बचाव के लिए हल्की सिंचाई तथा जिंक आधारित फफूंदीनाशक (मैंकोजेब) का छिड़काव उपयोगी सिद्ध होता है। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक सलाह के अनुसार समय पर उपाय अपनाकर अपनी फसलों को नुकसान से बचाएं।
