नई शिक्षा नीति, नवाचार और कौशल विकास से ही साकार होगा विकसित भारत का सपना: प्रो. शेफाली सिंह
अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। रमाबाई राजकीय महिला महाविद्यालय, अकबरपुर में गुरुवार को “विकसित भारत–2047: उच्च शिक्षा में चुनौतियां और संभावनाएं” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य एवं संरक्षक प्रोफेसर शेफाली सिंह ने की।
कार्यशाला के दौरान वक्ताओं ने परिचर्चा करते हुए कहा कि विकसित भारत–2047 की परिकल्पना को साकार करने में उच्च शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उच्च शिक्षा किसी भी देश के बौद्धिक, आर्थिक और तकनीकी विकास की आधारशिला होती है। भारत के पास विशाल युवा जनसंख्या है, जिसे उच्च शिक्षा के माध्यम से ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदला जा सकता है।
वक्ताओं ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 ने बहुविषयक शिक्षा, शोध, नवाचार, डिजिटल लर्निंग और कौशल विकास को बढ़ावा देकर उच्च शिक्षा में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, स्टार्ट-अप संस्कृति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से भारत वैश्विक शिक्षा केंद्र के रूप में उभर सकता है।
हालांकि, कार्यशाला में यह भी बताया गया कि उच्च शिक्षा के समक्ष कई चुनौतियाँ मौजूद हैं। समान शिक्षा तक पहुंच का अभाव, ग्रामीण-शहरी विषमता, शिक्षकों की कमी, शोध की सीमित गुणवत्ता, रोजगारोन्मुख शिक्षा का अभाव, अधोसंरचना की कमी और उद्योग एवं शिक्षा के बीच कमजोर समन्वय प्रमुख समस्याएं हैं।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्राचार्य प्रोफेसर शेफाली सिंह ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और कौशल-आधारित बनाना होगा। उन्होंने विकसित भारत–2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सकारात्मक दिशा में ठोस कदम उठाने पर जोर दिया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के मुख्य शास्ता प्रो. अरविंद कुमार वर्मा, डॉ. नंदन सिंह, डॉ. सुनीता सिंह, डॉ. महेंद्र यादव, डॉ. रविंद्र कुमार वर्मा, डॉ. कुंवर संजय भारती, डॉ. संगीता, डॉ. वालेन्तिना प्रिया, डॉ. भानु प्रताप राय, डॉ. सतीश कुमार उपाध्याय, विद्याधर मिश्र, कृष्ण कुमार विश्वकर्मा सहित महाविद्यालय की समस्त छात्राएं उपस्थित रहीं।





