अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर।
डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती समिति रसूलाबाद हौजपट्टी के तत्वावधान में अयोध्या रोड स्थित ज्ञानपुरम, रसूलाबाद हौजपट्टी में देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लेकर उनके विचारों और संघर्षों को याद किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अटेवा के जिला संयोजक रामबली त्रिशरण ने सावित्रीबाई फुले के जीवन और सामाजिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उस दौर में जब समाज सती प्रथा, बाल विवाह और विधवा विवाह पर रोक जैसी कुरीतियों से जकड़ा हुआ था तथा महिलाओं को शिक्षा देना पाप समझा जाता था, तब सावित्रीबाई फुले ने साहसिक कदम उठाते हुए स्वयं शिक्षा ग्रहण की और महिलाओं के उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने बताया कि सावित्रीबाई फुले ने फातिमा शेख के सहयोग से 1 जनवरी 1848 को देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया और अपने जीवनकाल में कुल 18 विद्यालयों की स्थापना कर शिक्षा की अलख जगाई। उन्होंने सती प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई तथा विधवा विवाह को प्रोत्साहित किया। समाज सेवा के दौरान प्लेग जैसी महामारी से संक्रमित होने के कारण 10 मार्च 1897 को उनका निधन हो गया। उनके योगदान के सम्मान में देशभर में उनकी जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जाती है।
कार्यक्रम में राजा राम (पूर्व एडीओ पंचायत), काई राम, ओम प्रकाश कौशल, लाल बहादुर प्रभाकर सहित अन्य वक्ताओं ने भी सावित्रीबाई फुले के विचारों पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर गुलाब चंद, अमरनाथ, रामराज बौद्ध, रुक्म केश, प्रहलाद सेन, बच्चन राम, संजय कुमार , सभाजीत त्रिशरण सहित बड़ी संख्या में मोहल्लेवासी उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाया।