नियमों के उल्लंघन के आरोपों के बावजूद चुप्पी
बस्ती। जिले में प्रशासनिक आदेशों की वैधता को लेकर उठे सवालों के बावजूद कीर्ति सिंह को सुपरवाइजर का प्रभार दिए जाने के मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। न तो संबंधित आदेश को निरस्त किया गया है और न ही किसी प्रकार की जांच प्रक्रिया शुरू हुई है, जिससे मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।
जानकारी के अनुसार जिस अधिशासी अधिकारी (ईओ) को प्रभार देने का अधिकार नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है, उसी स्तर से प्रस्ताव भेजे जाने की बात सामने आई है। शासनादेश में स्पष्ट व्यवस्था है कि किसी भी कर्मचारी को अतिरिक्त अथवा प्रभार संबंधी जिम्मेदारी केवल सक्षम अधिकारी द्वारा और निर्धारित नियमों के तहत ही दी जा सकती है। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक कीर्ति सिंह को एक साथ तीन नगर पंचायतों का प्रभार सौंपा गया है, जबकि शासनादेश में यह भी उल्लेख है कि प्रभार नजदीकी नगर निकाय के आधार पर दिया जाना चाहिए, ताकि कार्य व्यवस्था प्रभावित न हो। नियमों के इस प्रावधान का पालन न किए जाने को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायतें और आपत्तियां सामने आने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यदि प्रभार नियमों के विपरीत दिया गया था, तो उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
इस संबंध में अपर जिलाधिकारी प्रतिपाल चौहान ने बताया कि अधिशासी अधिकारी कीर्ति सिंह को तीन नगर पंचायतों का प्रभार शासन के आदेश के तहत दिया गया है। हालांकि शासनादेश का स्पष्ट विवरण या प्रति सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाई गई है, जिससे संशय की स्थिति बनी हुई है।
यह प्रकरण अब केवल एक प्रशासनिक आदेश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि जिला प्रशासन की कार्यशैली, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा मामला बन गया है। जानकारों का कहना है कि कार्रवाई न होने से नियमों के उल्लंघन को लेकर गलत संदेश जा रहा है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और क्या शासन स्तर पर इस प्रकरण का संज्ञान लेकर स्थिति स्पष्ट की जाती है या फिर मामला यूं ही लंबित बना रहेगा।
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