बस्ती। दुबौलिया थाना क्षेत्र के भरुकहवा गांव निवासी धर्मेन्द्र पुत्र उत्तम ने मुख्यमंत्री, मंडलायुक्त एवं जिलाधिकारी को पत्र भेजकर ग्राम प्रधान साधू पुत्र बाबूलाल तथा तहसील स्तर के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि न्यायालय में वाद लंबित होने के बावजूद उनके छप्परपोश मकान को जेसीबी मशीन से ध्वस्त करा दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और राहत की मांग की है।
धर्मेन्द्र के अनुसार उनका मकान गाटा संख्या 57, रकबा 0.9230 हेक्टेयर में स्थित था, जो राजस्व अभिलेखों में सामान्य आबादी के रूप में दर्ज है। इसी भूमि के एक हिस्से पर वर्षों से उनका छप्परपोश मकान था, जो पीढ़ियों से उनके परिवार का निवास रहा है। आरोप है कि पंचायत चुनाव के बाद ग्राम प्रधान से मतभेद उत्पन्न हो गए और मत न देने की रंजिश में नायब तहसीलदार कप्तानगंज, हल्का लेखपाल ऊषा वर्मा व हल्का कानूनगो अरविन्द कुमार से मिलीभगत कर मकान गिरवाने की योजना बनाई गई।
पीड़ित ने इस आशंका के चलते सिविल जज (जू.डि.), बस्ती के न्यायालय में सिविल वाद संख्या 1092/2025 दाखिल किया था, जिसे न्यायालय ने प्रथम दृष्टया स्वीकार करते हुए विपक्षियों को नोटिस जारी किया। इसके बावजूद 7 जनवरी 2026 को दोपहर करीब 12:30 बजे ग्राम प्रधान व तहसील कर्मी मौके पर पहुंचे और जेसीबी मशीन से मकान ध्वस्त करा दिया। परिवार द्वारा न्यायालय के कागजात दिखाकर कार्रवाई रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
मकान ढहाए जाने के बाद पीड़ित परिवार कड़ाके की ठंड में पॉलिथीन के सहारे रहने को मजबूर है।
धर्मेन्द्र ने बताया कि उनका परिवार भूमिहीन अनुसूचित जाति (खटिक) से संबंधित है और रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान अब उक्त भूमि पर कब्जा कर अवैध निर्माण कराने की तैयारी में हैं।
समाचार लिखे जाने तक तहसील प्रशासन या ग्राम प्रधान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।