अव्यवस्थाओं पर अधिवक्ताओं का फूटा गुस्सा, समाधान दिवस में अधिकारियों की लेटलतीफी से बढ़ा हंगामा……..

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अवधी खबर संवाददाता

मोहनलालगंज। लखनऊ, मोहनलालगंज तहसील में प्रशासनिक एवं न्यायिक कार्यप्रणाली को लेकर बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि उनकी राय और विचार-विमर्श के बिना सुदूर ग्रामीण अंचल में उपनिबंधक कार्यालय की स्थापना कर दी गई, जिससे अधिवक्ताओं के साथ-साथ वादकारियों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

अधिवक्ताओं का कहना है कि तहसील स्थित न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों का विहित समय-सीमा के भीतर पालन नहीं किया जा रहा है। बहस पूर्ण हो जाने के बावजूद आदेश पारित करने में अनावश्यक विलंब किया जाता है, वहीं अविवादित वरासत से जुड़ी पत्रावलियां भी महीनों तक लंबित रखी जा रही हैं।

बार एसोसिएशन ने लेखपालों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। अधिवक्ताओं के अनुसार लेखपाल समय से आख्या प्रस्तुत नहीं करते और कई मामलों में अधिवक्ताओं के साथ अभद्रता, मारपीट एवं दबंगई जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। इसके साथ ही उपजिलाधिकारी मोहनलालगंज पर दलालों के माध्यम से मनमाने ढंग से पत्रावलियों का निस्तारण कराने के आरोप लगाए गए हैं।

इसी क्रम में तहसील मोहनलालगंज में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में भी भारी अव्यवस्था देखने को मिली। समाधान दिवस में उपजिलाधिकारी पवन पटेल एवं तहसीलदार रितुराज शुक्ला फरियादियों की समस्याएं सुनते नजर आए, जबकि प्रभारी एडीएम सहित पुलिस एवं अन्य विभागों के अधिकारी सुबह 11:40 बजे तक कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचे।

मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले इस कार्यक्रम में अधिकारियों की लेटलतीफी से फरियादियों एवं अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी देखी गई।
अधिकारियों के समय से न पहुंचने को लेकर समाधान दिवस में काफी देर तक हंगामा होता रहा। लोगों का कहना था कि जब शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता वाले कार्यक्रम में ही लापरवाही बरती जा रही है, तो आम दिनों में समस्याओं के समाधान की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

इसके अलावा तहसील परिसर एवं मुख्य द्वार के सामने फैली गंदगी को लेकर भी अधिकारियों पर गंभीर अनदेखी के आरोप लगाए गए। अधिवक्ताओं ने मांग की कि नई नियुक्त महिला लेखपालों को वरिष्ठ लेखपालों के साथ संबद्ध कर उचित प्रशिक्षण देने के बाद ही स्वतंत्र प्रभार सौंपा जाए।


बार एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक इन सभी समस्याओं का शत-प्रतिशत समाधान सक्षम अधिकारियों द्वारा नहीं किया जाता, तब तक न्यायिक कार्य सुचारू रूप से संचालित होना संभव नहीं है। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे अपने मुवक्किलों के प्रति जवाबदेह हैं और लगातार बनी अव्यवस्थाओं के कारण उनकी पेशेवर साख प्रभावित हो रही है।


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