वकीलों ने न्याय मार्ग जाम कर किया विरोध प्रदर्शन सरकार के संशोधित बिल के खिलाफ की जमकर नारेबाजी

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बस्ती। जनपद में अधिवक्ता संशोधन बिल के विरोध में अधिवक्ताओं का आक्रोश लगातार बढ़ता ही जा रहा है बता दें कि सोमवार को न्याय मार्ग पर जाम लगाकर जोरदार प्रदर्शन किया वरिष्ठ अधिवक्ता उपेन्द्र दूबे ने कहा कि अधिवक्ता अपनी मांगों को मनवाकर ही राहत की सांस लेंगे और सरकार को यह काला कानून वापस लेना ही पड़ेगा। तो वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप पाण्डेय ने कहा इस काले कानून को लेकर अधिवक्ताओं के समक्ष विषम परिस्थितियां हैं उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय व्यवस्था पर लगाम लगाने के बजाय सरकार में अधिवक्ताओं पर अंकुश लगाया जा रहा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि अधिवक्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं इसलिए सरकार द्वारा अधिवक्ताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। तो आइये आपको बताते हैं कि अधिवक्ताओं में क्यों है इतनी नाराजगी बता दें कि एडवोकेट एक्ट 1961 में किए जा रहे विवादास्पद बदलाव की वजह से वकील समूदाय लगातार आंदोलित हो रहे हैं इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जनपद के वरिष्ठ अधिवक्ता विरेन्द्र पांडेय ने कहा कि इसमें कई प्रावधानों की पहचान की गई है जो अगर अधिनियमित किए जाते हैं तो कानूनी पेशे पर विपरीत प्रभाव डालेंगे। कहा कि यह संशोधित बिल हमारी सर्वोच्च संस्था बीसीआई की स्वायत्तता और उसकी अखंडता को कमजोर करेगी। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक-2025 से बार काउंसिल में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ जाएगा। इसके लिए तैयार किए मनसौदे से बार की स्वायत्तता और स्वतंत्रता की अवधारणा को ध्वस्त करने का प्रयास किया गया है।

अधिवक्ता उपेन्द्र नाथ दूबे ने कहा कि इस बिल के विरोध में जनपद के समूचे वकील आंदोलित हैं आगे और कड़ा विरोध होना तय है। तो वहीं एडवोकेट राधेश्याम शुक्ल ने कहा कि यदि जानबूझकर किए गए कठोर प्रावधानों को तत्काल छोड़ा या संशोधित नहीं किया जाता है तो इसे अधिवक्ता समुदाय कदापि बर्दास्त नहीं करेगा। तो वहीं अधिवक्ता अजय पाल ने कहा कि अगर विधि मंत्रालय से जल्द ही कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिलता है तो विरोध प्रदर्शन अनिश्चित काल तक चलेगा। तो वहीं एडवोकट अशोक पांडेय ने भी अधिवक्ता (संशोधन) विधेयक-2025 की खामियां गिनाते हुए इसके दुष्प्रभावों को गिनाया। मुख्य रूप से विरोध प्रदर्शन में वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश दूबे रमेश पाण्डेय जवाहर मिश्र रविशंकर शुक्ल विनोद सिंह राधेश्याम यादव अमर सिंह समेत सैकड़ों अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया।


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