बस स्टैंड सहित कई स्थानों पर हालात खराब, दुर्गंध और पानी की कमी से राहगीर परेशान
अवधी खबर संवाददाता
उम्मेदाबाद। कस्बे में स्वच्छता के दावों की हकीकत सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति देखकर आसानी से समझी जा सकती है। ग्राम पंचायत की ओर से साफ-सफाई और स्वच्छता अभियान के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मुख्य बस स्टैंड सहित विभिन्न स्थानों पर बने सार्वजनिक शौचालय बदहाली और गंदगी का शिकार हैं। हालात ऐसे हैं कि लोगों को नाक पर रुमाल रखकर या सांस रोककर शौचालयों का उपयोग करना पड़ रहा है।
मुख्य बस स्टैंड पर स्थित सार्वजनिक शौचालयों में लंबे समय से नियमित सफाई नहीं होने के कारण दुर्गंध फैली हुई है। शौचालयों की दीवारें पान-गुटखे की पीक से रंगी हुई हैं, जबकि कई जगह शराब की खाली बोतलें और कचरा भी पड़ा दिखाई देता है। बाहर से रंगाई-पुताई कर शौचालयों को आकर्षक दिखाने का प्रयास किया गया है, लेकिन अंदर की स्थिति पूरी तरह बदहाल है।
कस्बे के आसपास के गांवों से आने वाले यात्रियों, व्यापारियों और दुकानदारों को मजबूरी में इन्हीं शौचालयों का उपयोग करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को झेलनी पड़ रही है। कई शौचालयों में पानी की व्यवस्था तक नहीं है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन और साफ-सफाई के बड़े-बड़े दावे केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं। यदि सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं किया गया तो इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत और संबंधित अधिकारियों से सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई, पानी की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि आमजन को राहत मिल सके।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
बस स्टैंड पर बने शौचालयों की स्थिति इतनी खराब है कि अंदर जाना मुश्किल हो जाता है। नियमित सफाई नहीं होने से बदबू और गंदगी फैली रहती है। — स्थानीय नागरिक जसवंत उम्मेदाबाद




