अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। बसखारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र में संचालित बताए जा रहे लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर के पंजीकरण और संचालन को लेकर प्रकाशित खबर के बाद मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। सेंटर से जुड़े सवालों का तथ्यात्मक जवाब देने के बजाय पत्रकारों पर ही सवाल उठाए जाने और उन्हें कथित तौर पर ‘झोलाछाप’ जैसे तमगे दिए जाने की चर्चा क्षेत्र में है। अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दस्तावेजों और संचालन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
सेंटर के पंजीकरण और संचालन को लेकर सवाल उठने के बाद सबसे अहम मुद्दा यह है कि यदि सेंटर के सभी कागजात और जरूरी अनुमतियां नियमानुसार हैं तो संबंधित दस्तावेज स्वास्थ्य विभाग के समक्ष प्रस्तुत कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती। इससे न केवल उठ रहे सवालों का जवाब मिलेगा, बल्कि सेंटर की वैधता को लेकर भी स्थिति साफ हो सकेगी।
वहीं, क्षेत्र में संबंधित चिकित्सक की योग्यता, सोनोग्राफी से जुड़ी पात्रता तथा अलग-अलग डायग्नोस्टिक सेंटरों पर उनकी उपलब्धता को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। कुछ कथित रिपोर्टों में चिकित्सक की उपलब्धता का समय सुबह करीब 8 से 9 बजे से दोपहर 2 से 3 बजे तक बताया गया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने यह स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है कि चिकित्सक किन-किन केंद्रों पर सेवाएं दे रहे हैं और वहां जांच किसकी वैधानिक निगरानी में संचालित हो रही है।
मामला केवल लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। शिखर डायग्नोस्टिक सेंटर समेत अन्य केंद्रों को लेकर भी सवाल उठने की बात कही जा रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग यदि सभी संबंधित केंद्रों के पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता, संचालन की अनुमति और जांच व्यवस्था का सत्यापन कर दे तो कई सवालों का एक साथ समाधान हो सकता है। पत्रकारों को फर्जी कहना किसी भी विवाद का समाधान नहीं है। यदि प्रकाशित खबर में कोई तथ्य गलत है तो संबंधित पक्ष दस्तावेज और आधिकारिक अभिलेख प्रस्तुत कर उसका खंडन कर सकता है। सेंटर का पंजीकरण, अल्ट्रासाउंड संचालन की अनुमति, संबंधित चिकित्सक की योग्यता और अन्य वैधानिक दस्तावेज सार्वजनिक अथवा सक्षम विभाग के समक्ष प्रस्तुत किए जाने से स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है।
वहीं, पत्रकारों को नोटिस दिए जाने या उनके खिलाफ नाराजगी जताए जाने मात्र से सेंटर की वैधता पर उठे सवाल समाप्त नहीं होते। वास्तविक स्थिति विभागीय जांच और दस्तावेजों के सत्यापन से ही सामने आएगी। क्षेत्र में संबंधित चिकित्सक द्वारा ऑपरेशन किए जाने तथा उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और सक्षम अधिकारियों की जांच जरूरी है। इसी तरह चिकित्सक के विरुद्ध पूर्व में मुकदमे दर्ज होने संबंधी दावों की पुष्टि भी आधिकारिक अभिलेखों से ही की जानी चाहिए। पूरे मामले में अब लोगों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं। सीएचसी बसखारी के अधीक्षक, उपजिलाधिकारी टांडा और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से अपेक्षा की जा रही है कि वे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। जांच में लक्ष्मी डायग्नोस्टिक सेंटर समेत संबंधित केंद्रों के पंजीकरण, अल्ट्रासाउंड संचालन की अनुमति, चिकित्सकों की पात्रता, सेंटरों पर उनकी उपलब्धता और मरीजों की जांच की निगरानी व्यवस्था का सत्यापन किया जाना चाहिए।
यदि सभी दस्तावेज नियमानुसार पाए जाते हैं तो स्वास्थ्य विभाग जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर सकता है। वहीं किसी प्रकार की अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई भी संभव होगी।
फिलहाल सवाल सेंटर की वैधता से जुड़े दस्तावेजों और मरीजों की सुरक्षा का है। नाराजगी और आरोप प्रत्यारोप से बेहतर यही होगा कि संबंधित पक्ष दस्तावेज सामने रखे और स्वास्थ्य विभाग निष्पक्ष जांच के जरिए पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर जनता के सामने रखे।




