मुकदमा दर्ज न होने से पीड़ितों को एसपी कार्यालय की दौड़, नीलगाय के शिकार मामले में भी कार्रवाई पर सवाल
अवधी खबर संवाददाता
अम्बेडकरनगर। भीटी थाना क्षेत्र में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं और कुछ मामलों में मुकदमा दर्ज न होने के आरोपों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ितों का आरोप है कि थाने स्तर पर सुनवाई न होने के कारण उन्हें पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके बावजूद कई मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कुछ मामलों में पुलिस अधीक्षक को भी गुमराह कर दिया जा रहा है।
क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर स्थिति की वास्तविकता जानने के लिए भीटी थाने की गोपनीय जांच कराए जाने की मांग भी उठ रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ऐसी जांच में थानों पर पहुंचने वाले पीड़ितों की समस्याओं और पुलिस की कार्रवाई की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
एक दिन पहले भीटी थाना क्षेत्र के काही ग्रामसभा के मजरे जोगी के पूरा में बिजली का तार लगाकर नीलगाय का शिकार किए जाने की सूचना सामने आई थी। ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस तीन संदिग्धों को थाने ले गई। आरोप है कि मामले को वन्यजीव शिकार के बजाय बिजली चोरी से जोड़ते हुए कार्रवाई की गई और आरोपियों का 151 में चालान कर दिया गया।
मीडिया पड़ताल के दौरान गन्ने के खेत में कई स्थानों पर खून के धब्बे, पत्तियों पर खून के छींटे तथा कथित रूप से नीलगाय के अवशेष मिलने की बात सामने आई। इससे पूरे मामले की जांच और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
वहीं, बीते 20 सितंबर 2026 की सुबह भीटी थाना क्षेत्र के नारायणपुर घाट पर नदी में आधा दर्जन से अधिक जानवरों के कटे हुए अवशेष मिलने की घटना भी सामने आई थी। इस मामले में भी अब तक प्रभावी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं पुलिस के लिए चुनौती बनती जा रही हैं।
बीते 3 अगस्त 2026 की रात अज्ञात चोरों ने उमरावा गांव में तीन घरों को अपना निशाना बनाते हुए चोरी की घटना का वारदात देते हुए कई लाखों रुपए जेवरात पर अपना हाथ साफ कर दिया था उस मामले का भी अभी पुलिस खुलासा नहीं कर पाई है।
सूत्रों का कहना है कि भीटी थाने पर पहुंचने वाले पीड़ितों की शिकायतों पर कई बार मुकदमा दर्ज करने के बजाय मामले को समझौते अथवा अन्य माध्यम से निस्तारित करने का प्रयास किया जाता है। कुछ शिकायतकर्ताओं ने तो गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि शिकायत पत्रों के आधार पर आरोपित पक्ष से कथित रूप से लेन-देन की कोशिश की जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्षेत्रीय लोगों की मांग है कि भीटी थाने में लंबित शिकायतों, मुकदमों और अपराधों की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। साथ ही थानों की कार्यप्रणाली की गोपनीय जांच कराकर यह पता लगाया जाए कि पीड़ितों की शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई हो रही है या नहीं।
मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए क्षेत्राधिकारी भीटी लक्ष्मीकांत व भीटी थानाध्यक्ष कृष्णवली से दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हो सका। ऐसे में संबंधित आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने नहीं आ सका।




